बदलापुर ने की ब्राह्मणों की चिंता,तो कोई थाम लिया फरसा, कोई एक्सीडेंटल हिंदू को कर बैठा याद: धनंजय सिंह
बदलापुर ने की ब्राह्मणों की चिंता,तो कोई थाम लिया फरसा, कोई एक्सीडेंटल हिंदू को कर बैठा याद: धनंजय सिंह


03 Jan 2022 |  44





लखनऊ। बदलापुर फिल्म 2015 में आई थी। फिल्म में टिपिकल मसाला, मार-धाड़, रोमांस और बदले की कहानी पर है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की तरफ रूख करेंगे तो आपको जौनपुर जिले में बदलापुर मिलेगा। आज कल बदलापुर में राजनीति की बिसात पर एक-दूसरे को मात देने की जबरदस्त सियासी चाल चली जा रही है।इस सियासी चाल में प्रदेश के ब्राह्मण मोहरे बन रहे हैं। प्रदेश में ब्राह्मण 12 फीसदी हैं और ये सबसे बड़े गेमचेंजर में से एक है।भूमिहार ब्राह्मण कहलाने वालों को इसमें जोड़ दिया जाए तो ब्राह्मणों की संख्या 14 से 15 प्रतिशत हो जाएगी।

हिंदुत्व से पहले करें ब्राह्मणों की चिंता

जौनपुर जिले के बदलापुर का जिक्र इसलिए कि यहां हुए ब्रह्मदेश समागम ने प्रदेश की सियासत की दशा और दिशा बदलने के लिए ठान लिया है।बदलापुर के कड़ेरेपुर गांव में हुए ब्रह्मदेश समागम में ब्राह्मणों के हितों पर मंथन हुआ।इसमें बदलापुर के पूर्व विधायक ओमप्रकाश बाबा ने दावा तेजी के साथ ठोका है कि हिंदुत्व की रक्षा पर बयानबाजी की जा रही है। ब्राह्मणों की रक्षा सबसे पहले जरूरी है,ब्राह्मणों की रक्षा पर चिंतन-मंथन करना पहली प्राथमिकता होना चाहिए।

ब्राह्मण वोटबैंक और एक्सीडेंटल हिंदू

बदलापुर के ब्रह्मदेश समागम में जिक्र हुआ कि किसान और ब्राह्मण दोनों राजनीति में हाशिए की नोक पर हैं। बदलापुर से उठी ब्राह्मणों पर मंथन-चिंतन की आवाज को राजनीति दलों ने बड़ी तेजी से कैच और कैश कर लिया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अमेठी में थे। इस दौरान उन्होंने जनसभा को संबोधित किया।तेवर के अनुरूप सीएम योगी ने राहुल गांधी के हिंदुत्व और हिंदुत्ववादी बयान पर तंज कसते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने खुद को एक्सीडेंटल हिंदू कहा था,अब, बच्चे जनेऊ लेकर खुद को ब्राह्मण कहने लगे हैं।सीएम योगी ने अपने इस बयान से कहीं न कहीं हिंदू और ब्राह्मण वोटबैंक को गोलबंद करने की कोशिश की है,आखिर सीएम योगी ऐसा क्यों कर रहे हैं।

यादव जी के हाथ में परशुराम का फरसा

अगर उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल को देखा जाए तो अभी दंगल की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन यात्राओं, जनसभाओं और रैलियों का शोरगुल बड़े जोर शोर से जारी है।अल्पसंख्यकों के आसरे सत्ता की चाबी हासिल करने वाले नेता भी मंदिरों के फेरे पर फेरे लगाकर सोशल मीडिया पर दिन रात फोटो पोस्ट कर रहे हैं। कई नेताओं ने रातों रात खुद की इमेज को ब्राह्मणवादी करार किया है।इसमें सबसे बड़ा नाम सामाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का है।

रविवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव भगवान परशुराम का फरसा लेकर ट्विटर पर अवतार लिए और सवर्ण यात्रा निकालने का ऐलान किया है। अखिलेश यादव ने काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के समय भी कहा था कि उनकी सरकार में काम शुरू हुआ था और अयोध्या पर भी भाजपा को घेर चुके हैं।

सपा और बसपा ब्राह्मणों के पीछे पीछे

सपा मुखिया अखिलेश यादव भाजपा के कोर वोटर् पर निशाना पर निशाना पैनी नजर से साध रहे हैं।इसमें ब्राह्मण वोटर सबसे बड़े हैं।पूर्वांचल की राजनीति में रसूख रखने वाले सबसे बड़े तिवारी परिवार को भी सपा से जोड़कर अखिलेश यादव ने अपना स्टैंड एकदम साफ कर दिया है। इसके पहले 2019 और 20 में सपा ने 57 जिलों में कार्यक्रम किए थे,और लगभग 22 जिलों में परशुराम की मूर्तियां भी स्थापित की जा चुकी हैं। बहुजन समाजवादी पार्टी की मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी ब्राह्मणों के वोट पर सेंधमारी करने की कोशिश में हैं। मायावती ने प्रबुद्ध सम्मेलन का आयोजन किया और ब्राह्मणों से साथ देने की अपील की।मायावती ने कहा था कि बसपा में ही ब्राह्मणों को सम्मान मिलेगा।

बसपा के सोशल इंजीनियरिंग का भी जादू

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोटबैंक देखा जाए तो इनके सहारे 2007 में मायावती लखनऊ के सिंहसन पर विराजमान हुईं थीं। 2007 में मायावती और बसपा के लिए सतीश चंद्र मिश्रा ने सोशल इंजीनियरिंग का सुपरहिट फॉर्मूला बनाया था और इसमें दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण थे। 2012 में बसपा के सोशल इंजीनियरिंग की हवा फुस होकर निकल गई।

अब 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फिर बहुजन समाज वाली मायावती को ब्राह्मणों की याद आई है।अखिलेश भी परशुराम के आसरे खुद को ब्राह्मणों से कनेक्ट कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के तमाम दिग्गज नेता प्रभु श्रीराम और काशी विश्वनाथ धाम का नाम लेकर ब्राह्मणों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अब चलते-चलते बात करते हैं बदलापुर की। बदलापुर से ब्राह्मणों के लिए चिंतन और मंथन की बात की गई,क्या बदलापुर यूपी की राजनीति बदल देगा? जवाब के लिए इंतजार करिए।


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