बेटियों के साथ बर्बरता की घटनाएं शर्मनाक और चिंतनीय: प्रमोद तिवारी
बेटियों के साथ बर्बरता की घटनाएं शर्मनाक और चिंतनीय:प्रमोद तिवारी


05 May 2022 |  59



रिपोर्ट-शिव शंकर त्रिपाठी

प्रतापगढ़।कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने ललितपुर में मासूम बेटी के साथ पाली थाने के थाना प्रभारी द्वारा दुष्कर्म की वारदात को भारतीय जनता पार्टी के कुशासन का शर्मनाक और खौफनाक चेहरा बेपर्दा होना करार दिया है।

गुरुवार को प्रमोद तिवारी ने कानून व्यवस्था के बिगड़ते हालात पर हमलावर होते हुए कहा कि चंदौली में भी बेटी को पीट पीट कर मार डाला गया।भाजपा शासित मध्य प्रदेश में दो आदिवासियों की पीट-पीट कर हुई निर्मम हत्या जैसी घटनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा जिस तरह से कानून व्यवस्था और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र मे लगातार विफल हो रही है। कानून व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को लेकर सरकारी विफलता से यह साफ हो गया है कि भाजपा को सरकार चलाने का अनुभव न के बराबर है।

तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि बेटियों के साथ बर्बरता से अब लोगों में भाजपा के बेटी बचाओं,बेटी पढ़ाओं के नारे को लेकर चिन्ता इस बात की होने लगी है कि थाने में गैंगरेप पीड़िता के साथ इंसाफ मांगने पर खुद भाजपा सरकार की पुलिस दुष्कर्म कर रही है तो वह बेटियों को अब पुलिस और सरकारी मशीनरियों से कैसे बचाये।लखीमपुर खीरी में किसानों की मंत्री पुत्र द्वारा निर्मम हत्या तक के मामले मे यूपी सरकार और सक्षम एजेंसी ने गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के पुत्र आशीष की जमानत के विरोध को लेकर पैरवी का संवैधानिक उत्तरदायित्व नही निभाया। ऐसे मे यदि किसान नेताओं को यह लग रहा है कि सरकार गृह राज्य मंत्री के दबाव में मुकदमें की पैरवी भी नहीं करेगी तो उनमें आक्रोश उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

तिवारी ने आरबीआई के द्वारा प्रमुख नीतिगत दर रेपो को बढाए जाने की घोषणा को भी मंहगाई का एक और मोदी सरकार का मध्यम वर्ग की जनता पर कहर करार दिया है। तिवारी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के साथ अब दूध व तेल तक के दामों मे और वृद्धि की संभावना ने घरेलू बाजार के हालात चिन्ताजनक बना दिया है।उन्होंने ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि सरकारी मशीनरी के कुप्रबंधन तथा बिचौलिएपन के कारण गेहूं की सरकारी खरीद लगातार घट रही है।राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को चौपट करने के लिए मोदी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होनें कड़े अंदाज मे कहा कि यह सरकार न तो मंहगाई पर नियंत्रण कर पा रही है और न ही इसके बूते कानून और व्यवस्था को संभाल पाने की क्षमता रह गयी है।


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