यूपी राज्यसभा चुनाव:11वीं सीट के लिए क्यों बढ़ जाएगी छोटे दलों की अहमियत,आइए जानें
यूपी राज्यसभा चुनाव: 11वीं सीट के लिए क्यों बढ़ जाएगी छोटे दलों की अहमियत, आइए जानें


13 May 2022 |  35



धनंजय सिंह स्वराज सवेरा एडिटर इन चीफ यूपी

लखनऊ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की नजरे अब उत्तर प्रदेश में 11 सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव पर जाकर टिक गई हैं।आंकड़ों के मुताबिक भाजपा इनमें से सात सीटें तो आसानी से जीत लेगी,लेकिन आठवीं सीट के लिए उसको निर्दलीय विधायकों और छोटे दलों को खुश करने के लिए हाथ पांव चलाना पड़ेगा। इस लिहाज से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की टेंशन भी बढ़ेगी,क्योंकि भाजपा और सपा अंतिम उम्मीदवार को लेकर ऐड़ी से लेकर चोटी तक जोर लगाएगी। हालांकि इस मामले में भाजपा भारी दिखाई दे रही है,क्योंकि सत्ता में होने के कारण निर्दल और छोटे दलों को साधना काफी आसान हो जाता है।

सात सीटें भाजपा और तीन सीटें सपा के खाते में जाएंगी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी को बुरी तरह शिकस्त दी है‌।अब राज्यसभा चुनाव में भी बेहद रोचक मुकाबला होने जा रहा है। यूपी के कोटे से 11 सीटें जुलाई में खाली होने जा रही हैं,इन पर चुनाव होगा। इनमें से 10 पर तो नतीजे लगभग साफ हैं। इनमें से 7 सीटों पर भाजपा की जीत पक्की है तो 3 सीटें सपा खाते में आसानी से जाएंगी,लेकिन 11वीं सीट पर कौन बाजी मारेगा यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।हालांकि राज्यसभा से पहले भाजपा ने विधान परिषद के चुनाव में भी सपा को जोरदार शिकस्त दी थी।



पिछली बार 11 सीटों में पांच भाजपा और तीन सपा के पास

राज्यसभा चुनाव में 11 सीटें खाली हो रही हैं।इन 11 सीटों में 5 भाजपा के पास,तीन सपा, दो बसपा और एक कांग्रेस के पास है। यूपी में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो राज्यसभा के एक उम्मीदवार की जीत के लिए कम से कम 37 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। भाजपा गठबंधन के पास 273 विधायक हैं और इस लिहाज से एनडीए को सात सीटें आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन आठवीं सीट के लिए उन्हें निर्देलियों और छोटे दलों को अपने पाले में लाना होगा।

तीन सीटों को आसानी से जीत लेगा अखिलेश गठबंधन

वहीं दूसरी ओर सपा की बात करें तो यह गठबंधन 125 विधायकों के साथ तीन प्रत्याशियों को आसानी से जिता लेगा। वहीं 11वीं सीट के लिए मुकाबला बेहद रोचक होगा, क्योंकि भाजपा और सपा को इसके लिए राजा भइया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और कांग्रेस के पास 2-2 और बसपा के पास एक सीट है।देखना रोचक होगा कि कौन सी पार्टी किसके साथ जाती है।

जुलाई में 11 सांसदों का कार्यकाल होगा समाप्त

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की सीटों के लिए चुनाव की तिथियों का ऐलान कर दिया है। यूपी के 11 सांसद रिटायर होने जा रहे हैं, उनमें भाजपा के जफर इस्लाम, शिव प्रताप शुक्ला, संजय सेठ, सुरेंद्र नागर और जय प्रकाश निषाद शामिल हैं।सपा के सुखराम सिंह यादव, विशंभर प्रसाद निषाद और रेवती रमण सिंह भी रिटायर होने जा रहे हैं। बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, अशोक सिद्धार्थ और कांग्रेस के कपिल सिब्बल का कार्यकाल भी पूरा होने जा रहा है।यूपी से 31 राज्यसभा सांसद चुने जाते हैं और फिलहाल भाजपा के पास 22, सपा के पास 5, बसपा के पास तीन और कांग्रेस के पास एक सांसद हैं।


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