यूपी में भाजपा पुराने चेहरे पर लगा सकती है दांव, जानें कौन हो सकता है स्वतंत्र देव का विकल्प
यूपी में भाजपा पुराने चेहरे पर लगा सकती है दांव,जानें कौन हो सकता है स्वतंत्र देव का विकल्प


13 May 2022 |  44



रिपोर्ट-अनुज सिंह

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए दो महीने पूरे हो चुके हैं।दो महीने चुनाव बीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी अभी तक अपना नया प्रदेश अध्यक्ष नहीं ढूंढ़ पाई है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जो अटकलें चल रही हैं उसके अनुसार भाजपा किसी ब्राह्मण चेहरा या दलित पर दांव लगा सकती है और इसके लिए ऐसे चेहरों की तलाश की जा रही है जिनकी लोकप्रियता कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक(पश्चिम से लेकर पूरब तक) हो, लेकिन अभी कोई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सांचे में फिट नहीं बैठ रहा है।सवाल ये है कि क्या भाजपा अपनी यूपी इकाई का नेतृत्व करने के लिए किसी पुराने नेता को ही चुनेगी।

नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश में जुटी है भाजपा

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है,जिससे नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश जरूरी हो गई है।जबकि भाजपा अपने पत्ते अपने सीने से चिपका कर रखती है।सियासी सुर्खियों में भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक 20 और 21 मई को जयपुर में होने वाली है, जिसमें भगवा के लिए एक औपचारिक खाका तैयार होने की आशा है।

नए चेहरे की बजाए पुराने पर दांव लगा सकती है भाजपा

पार्टी थिंक टैंक का मानना ​​​​है कि नए भाजपा अध्यक्ष के रूप में एक अच्छी तरह से स्थापित नेता को ही पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए जिससे सुनील बंसल की भी भरपाई हो सके। सुनील बंसल को एक प्रमुख पार्टी रणनीतिकार माना जाता है। सूत्रों ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरे कार्यकाल की तलाश करेंगे, तो एक अच्छे नेता के नेतृत्व में एक मजबूत राज्य संगठनात्मक ढांचा भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है।

कई लोगों के नामों पर चल रहा है मंथन

भाजपा में पहले से ही कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के नामों की चर्चा है,जिन्हें राज्य इकाई की कमान सौंपी जा सकती है।सूत्रों का कहना है कि अगर भाजपा ने एक ब्राह्मण को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह 2014 के बाद से हर लोकसभा चुनाव से पहले एक प्रवृत्ति रही है। भाजपा यूपी के पूर्व भाजपा प्रमुख और देवरिया के सांसद रमापति राम त्रिपाठी पर विचार कर सकती है। वहीं दूसरी ओर पिछड़ों में एक नाम बाबूराम निषाद का भी सामने आ रहा है। शीर्ष नेतृत्व इनके उपर भी विचार कर रहा है।

पुराने और विश्वसनीय चेहरे की तलाश में भाजपा

यूपी के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और मेरठ के पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत बाजपेयी और मैनपुरी से लगातार दूसरी बार जीते राम नरेश अग्निहोत्री का नाम भी चर्चा में हैं।भाजपा के ओबीसी या दलित को नियुक्त कर रणनीति में नाटकीय बदलाव के बारे में भी अटकलें लगाई जा रही हैं।ओबीसी नेताओं में पार्टी थिंक टैंक राज्यसभा सदस्य बीएल वर्मा के नाम पर विचार कर रही है।ये लोध, वर्मा उत्तर-पूर्व विकास के लिए कनिष्ठ केंद्रीय मंत्री भी हैं।

दलित नेता का चुनाव भी कर सकती है भाजपा

प्रमुख दलित नेता और इटावा के सांसद राम शंकर कठेरिया भी नए प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल हैं। आरएसएस के पूर्व विभाग प्रचारक कठेरिया राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। वास्तव में भाजपा बसपा प्रमुख मायावती के वोट बैंक में मजबूत पैठ बनाने की कोशिश कर रही है,जिनके राजनीतिक कद को हाल ही में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भारी चोट लगी।जहां बसपा सिर्फ एक सीट जीत सकी। यूपी भाजपा के प्रवक्ता हीरो बाजपेयी ने कहा कि हम यूपी में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पार्टी को एक ऐसा नेता मिलने की उम्मीद है जो गतिशील हो और राज्य के मामलों से अच्छी तरह वाकिफ हो।


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