मोहब्बत की निशानी ताजमहल में बंदरों का आतंक, खूबसूरती को पहुंचा रहे नुकसान,पर्यटक हो रहे परेशान
मोहब्बत की निशानी ताजमहल में बंदरों का आतंक,
खूबसूरती को पहुंचा रहे नुकसान,पर्यटक हो रहे परेशान

21 Jun 2022 |  38



शुभम कुमार यूपी क्राइम हेड

आगरा।कहते हैं कि एक बार जब मोहब्बत की निशानी ताजमहल को देखने लगो तो उससे नजर नहीं हटती है। ताजमहल विश्व के सात अजूबों में से एक है।इसकी खूबसूरती देखते ही दिल आहें भरता है।आजकल ताजमहल की खूबसूरती को बंदर बट्टा लगा रहे हैं।इसके अलावा और भी आवारा जानवर वहां आने वाले पर्यटकों को परेशान कर रहे हैं।

ताजमहल के फाउंटेन को बंदरों ने स्विमिंग पूल की तरह इस्तेमाल करते हैं।इसके अलावा ताजमहल के गेट पर आवारा सांड़ों की लड़ाई में एक पानी का आरओ टूट गया।गनीमत रही की लड़ाई के समय ताजमहल बन्द हो चुका था और कोई पर्यटक मौजूद नहीं था। वरना सांड़ों की लड़ाई में कौन घायल होता पता नहीं।ऐसा नहीं है कि आने वाले पर्यटक सिर्फ बंदरों के आतंक से ही परेशान हों बल्कि आवारा कुत्ते, मधुमक्खियां और आवारा सांड़ से भी परेशान हैं।जिनके ऊपर जिम्मेदारी है,वो अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

मोहब्बत की निशानी ताजमहल में लगी पानी की टंकियों पर मधुमक्खियों का कब्जा है।मधुमक्खियों की वजह से आने वाले पर्यटकों को बहुत परेशानी होती है।बाहर और अंदर दोनों जगह आवारा कुत्तों से भी पर्यटक परेशान हैं। बाहर आवारा घूमने वाली गाय और सांड़ से कई बार पर्यटक नुकसान उठा चुके हैं।परिसर में बंदरों का जबरदस्त आतंक है।सोमवार को ताजमहल के अंदर का एक वीडियो सामने आया।वीडियो में दर्जनों बंदर ताजमहल के फाउंटेन के अंदर डुबकी पर डुबकी लगा रहे हैं।

आपको बता दें कि ताजमहल में लगने वाले मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है।बंदर पकड़ कर जंगल मे छोड़ना वन विभाग की जिम्मेदारी है और आवारा कुत्तों, गाय और सांड़ को पकड़ने की नगर निगम की जिम्मेदारी है,लेकिन तीनों ही विभाग कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं।इनकी कुंभकर्णी नींद से पर्यटकों को परेशानी हो रही है।ताजमहल समेत पूरे आगरा में बंदरों का जबरदस्त आतंक है।कुछ दिनों पहले प्रशासन ने दो करोड़ खर्च कर आगरा में बंदरों को पकड़ कर उनकी नसबंदी शुरू की थी। कई जगह पिंजरे लगाए गए थे पर बाद में यह योजना जैसे ही खत्म हुई, बंदरों का आतंक फिर से शुरू हो गया।आगरा में बंदरों की संख्या में 10 सालों में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।इसके बावजूद तमाम पशु प्रेमी संस्थाओं के विरोध के चलते इसका कोई उचित उपाय नहीं है।


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