45 करोड़ की जमीन,कागजों पर 75 लाख,ईडी ने अल फलाह के अध्यक्ष पर कसा शिकंजा,जानें किस मामले में किया गिरफ्तार
45 करोड़ की जमीन,कागजों पर 75 लाख,ईडी ने अल फलाह के अध्यक्ष पर कसा शिकंजा,जानें किस मामले में किया गिरफ्तार

27 Mar 2026 |   18



 

नई दिल्ली।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल-फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है।सिद्दीकी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएलएमए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। सिद्दीकी तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक और प्रमुख शेयरधारक भी हैं।

भूमि अधिग्रहण का हुआ खुलासा

ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 24 मार्च को यह कार्रवाई की।आज शुक्रवार को ईडी ने एक आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की।यह गिरफ्तारी अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ी जांच का हिस्सा है।जांच में अपराध की आय उत्पन्न करने और उसे सफेद करने का आरोप है।अल-फलाह समूह 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़ी जांच के दायरे में भी है। ईडी ने 17 जनवरी को सिद्दीकी के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की थी। जांच में जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों का उपयोग कर धोखाधड़ी से भूमि अधिग्रहण का खुलासा हुआ है।

भूमि अधिग्रहण में धोखाधड़ी

ईडी ने आरोप लगाया कि सिद्दीकी ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलीभगत की।सिद्दीकी ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और निष्पादित करने की सुनियोजित योजना बनाई। इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर गांव में खसरा संख्या 792 वाली भूमि को अवैध रूप से हासिल करना था। यह भूमि लगभग 1.146 एकड़ है और इसका वर्तमान मूल्य करीब 45 करोड़ रुपये है। दस्तावेजों में बिक्री 75 लाख रुपये दिखाया गया था। हालांकि, वास्तविक लेनदेन मूल्य काफी अधिक होने का संदेह है।

आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया

जांचकर्ता अब पूरे धन के स्रोत का पता लगाने में जुटे हैं। वे अन्य लाभार्थियों और अपराध की आय से कथित तौर पर हासिल की गई अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान कर रहे हैं। सिद्दीकी को 25 मार्च को साकेत स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सिद्दीकी को 4 अप्रैल तक ईडी हिरासत में भेज दिया है ताकि आगे की पूछताछ की जा सके।ईडी ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है। 

तीन साल जेल काट चुका जवाद अहमद 

अल फलाह यूनिवर्सिटी का मालिक 61 वर्षीय जवाद अहमद सिद्दीकी तीन वर्ष जेल में बंद रह चुका है। सिद्दीकी पहले चिट फंड का काम करता था।उसके बाद लोगों को पैसे नहीं दिए थे। सिद्दीकी के खिलाफ 14 से 15 एफआईआर दर्ज हुई थीं। माना जा रहा है कि सिद्दीकी इन पैसों से यूनिवर्सिटी को खड़ा करने में लगाया। हालांकि बाद में उसने सभी लोगों का पैसा लौटा दिया और सभी केसों से बरी हो गया था। साल 2000 दर्ज हुई एफआईआर (संख्या 43/2000) में सिद्दीकी और उनके भाई सऊद अहमद का नाम दर्ज किया गया था, जो नई दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 406 और 409 (आपराधिक न्यास का उल्लंघन), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेजों का उपयोग) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज की गई थी। उन पर 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप था।

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