भारतीय कंपनियों का विदेशों में बढ़ रहा निवेश,अब कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी दौड़ में,सिंगापुर फिर बना पहली पसंद
भारतीय कंपनियों का विदेशों में बढ़ रहा निवेश,अब कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी दौड़ में,सिंगापुर फिर बना पहली पसंद

31 Jul 2026 |   23



 

नई दिल्ली।भारत में आने वाले विदेशी निवेश की जमकर चर्चा होती है,लेकिन अब भारतीय कंपनियां भी तेजी से विदेशों में निवेश बढ़ा रही हैं।बरहाल बीते माह जून में विदेशों में भारतीय कंपनियों का निवेश पिछले साल के मुकाबले घटा है,लेकिन पिछले 10 साल का ट्रेंड बताता है कि भारतीय कंपनियों की वैश्विक मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।खास बात यह है कि अब सिर्फ वित्तीय कंपनियां ही नहीं,बल्कि कंस्ट्रक्शन, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर भी विदेशों में निवेश बढ़ा रहे हैं।

जानें जून में कितना रहा विदेशी निवेश

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक जून में भारतीय कंपनियों का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश घटकर 2.99 अरब डॉलर रह गया।एक साल पहले जून में यह 5.03 अरब डॉलर था। यानी सालाना आधार पर इसमें करीब 40.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।इस दौरान विदेशी कंपनियों में इक्विटी निवेश 2.2 अरब डॉलर से घटकर 73.8 करोड़ डॉलर रह गया। वहीं कर्ज के रूप में दिया गया निवेश भी 56.9 करोड़ डॉलर से घटकर 47 करोड़ डॉलर के करीब आ गया। विदेशी इकाइयों के लिए जारी गारंटी भी 2.97 अरब डॉलर से घटकर 1.78 अरब डॉलर रह गई।

10 साल में तेजी से बढ़ा भारतीय कंपनियों का निवेश

बरहाल जून के आंकड़े कमजोर रहे,लेकिन लंबी अवधि की तस्वीर अलग है। वित्त वर्ष 2016 में भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश 31.33 अरब डॉलर था,जो बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 46.86 अरब डॉलर पहुंच गया।यानी 10 साल में इसमें करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।कोरोना महामारी के दौरान इसमें गिरावट जरूर आई थी,लेकिन उसके बाद निवेश फिर बढ़ने लगा।

कौन से सेक्टर निकले आगे

विदेशों में निवेश के मामले में वित्तीय,बीमा और बिजनेस सर्विसेज सेक्टर लंबे समय से सबसे आगे रहे हैं,लेकिन जून में तस्वीर बदल गई।अप्रैल में कुल विदेशी निवेश का करीब दो-तिहाई हिस्सा इसी सेक्टर का था, जबकि जून में इसकी हिस्सेदारी घटकर 20 फीसदी से भी नीचे आ गई।दूसरी तरफ कंस्ट्रक्शन सेक्टर ने जोरदार छलांग लगाई। मई में जहां इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 5.17 फीसदी थी, वहीं जून में बढ़कर 25.68 फीसदी हो गई। यानी एक महीने में यह करीब पांच गुना बढ़ गई।

सिंगापुर फिर बना पहली पसंद

विदेशों में निवेश के लिए जून में भारतीय कंपनियों की सबसे पसंदीदा जगह फिर से सिंगापुर बन गया। अप्रैल और मई में अमेरिका और मॉरीशस आगे थे,लेकिन जून में सिंगापुर की हिस्सेदारी बढ़कर 23.79 फीसदी हो गई, जो मई में सिर्फ 8.59 फीसदी थी।वहीं मई में 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाला मॉरीशस जून में घटकर सिर्फ 1.08 फीसदी पर आ गया। पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी बताते हैं कि ज्यादातर समय सिंगापुर भारतीय कंपनियों की पहली पसंद रहा है।

इन कंपनियों ने किया बड़ा निवेश

आरबीआई के मुताबिक ONGC Videsh Rovuma ने मोजाम्बिक में अपने जॉइंट वेंचर में 4 करोड़ डॉलर का निवेश किया।वहीं Startup Investments ने सिंगापुर स्थित जॉइंट वेंचर में करीब 3.5 करोड़ डॉलर लगाए।इसके अलावा Lenskart ने सिंगापुर स्थित अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई में 2.2 करोड़ डॉलर का निवेश किया। GFCL EV Products ने ओमान में अपने जॉइंट वेंचर और पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी में कुल मिलाकर करीब 2 करोड़ डॉलर का निवेश किया। वहीं OneSource Specialty Pharma ने सिंगापुर स्थित अपनी इकाई में 1.8 करोड़ डॉलर का निवेश किया।

छोटी कंपनियों को भी चाहिए मदद

सेंटर फॉर WTO स्टडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की बड़ी कंपनियां अब दुनिया भर में निवेश कर रही हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत कर चुकी हैं। हालांकि मझोली कंपनियां अभी भी विदेशों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि छोटी कंपनियां अब भी सीमित और एक-दो बार के निवेश तक ही सीमित हैं।रिपोर्ट का मानना है कि अगर सरकार छोटे और मझोले कारोबारों को बेहतर नीतिगत मदद और आसान वित्तीय सहायता दे, तो ज्यादा भारतीय कंपनियां भी विदेशों में कारोबार बढ़ाने का मौका हासिल कर सकती हैं।

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