एक गुमनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,बटक मियां अंसारी
एक गुमनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,बटक मियां अंसारी


03 Oct 2021 |  17



 ब्यूरो अनुज प्रताप सिंह एटा



गांधी जी के हत्यारे को तो सब जानते है लेकिन उनकी जान बचाने वाले क्रांतिकारी बतख़ मियां उर्फ बटक मियां अंसारी को भुला दिया गया।वो क्रांतिकारी जिसने अपने बेटे की जान देकर गांधी जी की जान बचाई थी।यदि बटक मियां न होते तो शायद आज गांधी युग से भी लोग अंजान ही रहते।



बात सन 1917 की है जब गांधी जी चम्पारण सत्याग्रह पर मोतिहारी में किसानों के बीच गए थे।उनके समर्थन में इतनी भीड़ देखकर अंग्रेजी हुकूमत हिल गई।अंग्रेजों ने समझौते के लिए गांधी जी को खाने पर बुलाया।इसके लिए इरविन नामक अंग्रेज को चुना गया जोकि नील बनाने की फैक्ट्रियों के मैनेजरों का नेता था। उसके यहां बतख मियां खानसामा का कार्य करते थे।गांधी जी को खाना खिलाने की जिम्मेदारी बावर्ची बटक मियां अंसारी की थी। बटक मियां ने गांधी जी को खाना परोसा लेकिन जैसे ही गांधी जी ने खाना शुरू किया बटक मियां ने खाना छीन लिया और रोते हुए बोले इस खाने में ज़हर है। अंग्रेजों ने मुझे बेहद धमकाया है अगर मैंने आज आपको ज़हर नही दिया तो कल परिवार मे जाने क्या हादसा होगा, और वही हुआ गांधी जी के जाने के बाद उनके अंग्रेजों ने उनके घर को तबाह कर दिया एवं उनकी जमीन नीलाम करवा दी।देश आजद होने के बाद जब प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद मोतिहारी पंहुचे तो उनका भाषण सुनने भीड़ के बीच मे बटक मियां भी पहुँचे। डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भीड़ मे खड़े बटक मियां को पहचान लिया उन्हें स्टेज पर बुला कर अपने बगल में बिठाया और कहा 'ऐ मोतिहारी के लोगों मैं उस वक़्त मौजूद था जब इन्होंने अपने परिवार की परवाह किये बिना वो ज़हर मिला हुआ खाना गांधी जी के हाथों से छीन लिया था। अंग्रेजों ने उसके बाद इनका घर तबाह कर दिया था,आज मैं आपके बीच राष्ट्रपति बनकर आया हूँ जिस शख्स ने घर परिवार कुर्बान कर दिया आज मैं इन्हें 50 एकड़ जमीन मोतिहारी में देना चाहता हूं।' बटक मियां अंसारी दुनिया से चले गए लेकिन उनके जीते जी सरकार उन्हें वो जमीन नही दिला पाई।



प्राप्त जानकारी के मुताबिक बटक मियां के परिवार को 6 एकड़ जमीन दी गई थी,लेकिन परिवार का आरोप है कि ये जमीन बाढ़ में फंस कर नदी में समा गई।चार साल पहले उनके वारिसों ने गांधी मूर्ती के सामने चम्पारण में धरना दिया था।उस समय डीएम के जरिए सरकार से मांगें पूरी होने का आश्वासन दिया गया था।



कुछ वर्ष पहले बटक मियां अंसारी की अनोखी कहानी नाम से एक पुस्तक का विमोचन भी हुआ है।जिसके लेखक और संकलनकर्ता छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी और उसियां, गाजीपुर के रहने वाले मोहम्मद वजीर अंसारी हैं,जो गुमनाम नायकों को आगे लाने का काम कर रहे हैं।



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