नोएडा।दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार की एक बड़ी योजना है,जिसमें बुजुर्गों को मुफ्त में तीर्थ यात्रा कराई जाती है।इस योजना को दिल्ली की पूर्व केजरीवाल सरकार ने बड़े जोर-शोर से शुरू किया था,लेकिन इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार के जरिए जो जानकारी मांगी,उससे कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।यात्रियों की संख्या पहले बढ़ी,फिर घटती रही और सबसे बड़ी बात है कि रेखा सरकार के पास कई जरूरी आंकड़े ही नहीं हैं।
2018 में केजरीवाल ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की शुरूआत की
2018 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की शुरूआत की।इस योजना में दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से हर एक से 1,100 बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थ यात्रा कराई जाती है। 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग अपने पति या पत्नी के साथ जा सकते हैं। 70 साल से ऊपर वाले एक सहायक भी साथ ले जा सकते हैं।पूरा खर्च सरकार उठाती है।शुरुआत में पांच तीर्थ स्थान थे बाद में रामेश्वरम, शिर्डी,हरिद्वार,ऋषिकेश,मथुरा,वृंदावन,अयोध्या समेत एक दर्जन से ज्यादा जगहें जोड़ी गईं।
आरटीआई में आया सामने
इंडिया टुडे ने दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम से आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी,जो आंकड़े मिले वो ये हैं। 2019-20 में 35,759 लोगों ने यात्रा की। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2020-21 में कोरोना की वजह से शून्य यात्री गए। 2021-22 में 15,988 लोग गए. 2022-23 में थोड़ी बढ़त हुई और 18,980 लोग गए. 2023-24 में फिर गिरावट आई और सिर्फ 16,200 लोग गए।यानी कोरोना के बाद जितनी वापसी होनी चाहिए थी वो नहीं हुई,बल्कि संख्या पहले के मुकाबले काफी कम रही और आखिरी साल में और भी घट गई।
सबसे बड़ी कमी आई सामने
आरटीआई के जवाब में दो बड़ी बातें सामने आईं,ये सवाल खड़ा करती हैं।पहली बात यह कि सरकार के पास यह जानकारी ही नहीं है कि किस धर्म के कितने लोगों ने यात्रा की और उन पर कितना पैसा खर्च हुआ।जब यह एक सरकारी कल्याण योजना है तो यह बुनियादी जानकारी न होना एक बड़ा सवाल है।दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि 10 मार्च 2026 को मिले आरटीआई जवाब में 2024-25 और 2025-26 का कोई डेटा नहीं है।फरवरी 2025 में रेखा गुप्ता की अगुवाई में नई भाजपा सरकार सत्ता में आई तो इस नई सरकार के आने के बाद योजना चल रही है या नहीं,कितने लोग गए,कितना पैसा खर्च हुआ इसका कोई जवाब नहीं मिला।
कौन-सी जगहें सबसे ज्यादा पसंद की गईं
अब तक कुल मिलाकर सबसे ज्यादा लोग रामेश्वरम गए। रामेश्वरम जाने वालों की संख्या 27,409 है।दूसरे नंबर पर द्वारकाधीश रहा,जहां 26,388 लोग गए,जगन्नाथपुरी में 7,819 और तिरुपति में 6,763 लोग गए।
अब योजना का क्या है हाल
यही सबसे बड़ा सवाल है,जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।आरटीआई के जवाब से साफ है कि केजरीवाल सरकार के आखिरी सालों में ही यह योजना कमजोर पड़ने लगी थी और नई सरकार के आने के बाद क्या हुआ,इसका कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।बिना ताजा आंकड़ों के यह कहना मुश्किल है कि यह योजना अभी चल रही है,बंद हो गई है या बदल दी गई है।