कानपुर।उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात-सचेंडी सीमा पर एक दर्जन गांवों को मिनी जामताड़ा कहा जाता है।यहां साइबर ठगी का बड़ा गिरोह सक्रिय है।यहां लोगों ने साइबर अपराधियों को खेत,बगीचे,पानी की टंकी पर लैपटॉप और मोबाइल पर ठगी करते देखे जा चुके हैं,लेकिन अब तक रेउना की तरह इस क्षेत्र के गांवों में बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि यहां से पुलिस द्वारा कई बार में एक दर्जन से ज्यादा साइबर ठग गिरफ्तार कि जा चुके हैं,लेकिन जितने गिरफ्तार होते हैं उससे ज्यादा नए ठग तैयार हो जा रहे हैं।
नौकरी न मिलने वाले और घर बैठे कमाई करने वालों को सिखाते ठगी के तरीके
सचेंडी के कैंधा गांव के एक व्यक्ति के मुताबिक गांव में साइबर ठगों का बड़ा गिरोह चल रहा है।पूरा गांव जानता है,लेकिन कोई विरोध नहीं करता है।विरोध करने पर पूरा गिरोह और उनके परिवार के लोग विरोध करने वालों पर हावी हो जाते हैं। ये गिरोह उन लोगों को अपने यहां शामिल करता है, जो एशोआराम की जिंदगी जीना चाहता या फिर घर बैठे कमाई करने और नौकरी न मिलने वालों पर रुपये खर्च करते हैं और उसके बाद उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए उधार रुपये देते हैं,फिर वापस मांगते हैं। इसके बाद गिरोह में शामिल कर उन्हें ठगी के तरीके सिखाते हैं।
ई-कॉमर्स कंपनियों और जनसुविधा केंद्र से जुटाते डेटा
साइबर अपराधी ठगी करने के लिए जनसुविधा केंद्र, ई-कॉमर्स कंपनियों,डार्क वेब समेत माध्यम से लोगों को डेटा जुटाते हैं।इसके बाद उसे कई श्रेणी में बांटकर उसी स्तर के लोगों से ठगी करने के लिए काल करते हैं। जैसे जनसुविधा केंद्र के डेटा पर सरकार की योजनाओं का लाभ, ई-कामर्स साइट पर आर्डर कैंसिल करने व डार्क वेब के डेटा पर पुलिस का डर दिखाकर ठगी करते हैं।