भारत के चिनाब बांध प्रोजेक्ट से डरा पाकिस्तान,लगाई गुहार
भारत के चिनाब बांध प्रोजेक्ट से डरा पाकिस्तान,लगाई गुहार

04 Aug 2026 |   17



 

नई दिल्ली।साल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हमले के बाद सिंधु जल संधि निलंबित करने और चिनाब पर बांध बनाने के भारत के प्रोजेक्ट से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तानी नेताओं और आर्मी अफसरों ने इस मुद्दे पर भारत को युद्ध की गीदड़भभकी तक दी है।पाकिस्तान दुनिया के हर मंच पर भारत के खिलाफ झूठ फैला रहा है

चिनाब सिर्फ नक्शे पर एक लाइन नहीं है।यह एक जीवन-रेखा और सभ्यता का गलियारा है।यह हिमालय की एक नाजुक प्रणाली है,जो बर्फ के पिघलने से बना पानी,तलछट और जोखिम बराबर मात्रा में अपने साथ ले जाती है।जब भारत इसके पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने की बात करता है तो इसे महज इंजीनियरिंग का एक अंदरूनी बदलाव मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सीमाओं के आर-पार असर डालने वाला कदम है।इसके पर्यावरणीय,कानूनी, भू-वैज्ञानिक और मानवीय नतीजे इसकी अपनी सीमाओं से कहीं आगे तक जाते हैं। चिनाब-ब्यास लिंक के प्रस्ताव के बारे में हालिया खबरों ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है।

भारत की योजना यह है कि ऊपरी चिनाब प्रणाली से पानी निकाला जाए,शायद हिमाचल प्रदेश में चंद्रा नदी के पास एक सुरंग के जरिए और उसे ब्यास में भेजा जाए। व्यापक योजनाओं में नहरों के नेटवर्क के जरिए अतिरिक्त पानी को पंजाब,हरियाणा और राजस्थान की ओर ले जाने की बात है। सिंधु बेसिन में अतिरिक्त पानी सामान्य चीज नहीं है। एक देश का अतिरिक्त पानी दूसरे देश के लिए भूजल भंडार को फिर से भरने का जरिया, डेल्टा के अस्तित्व को बचाने का साधन या बाढ़ के मैदान की पारिस्थितिकी हो सकता है।

भारत का प्रोजेक्ट चिनाब सिंधु जल संधि के तहत आने वाली पूर्वी नदियों में से नहीं है। यह पश्चिमी नदी प्रणाली का हिस्सा है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित है और भारत को इसके सीमित इस्तेमाल की इजाजत है। अगर भारत अब सुरंगों और लिंक नहरों के जरिए इन जल-संबंधी वास्तविकताओं को बदलता है तो यह इंजीनियरिंग से कहीं आगे की बात है। यह पहाड़ में सुरंग खोदकर संधि को खोखला करना है।

हिमालय एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है। जलाशय के कारण होने वाली भूकंपीय गतिविधि एक जानी-मानी घटना है। बड़े जलाशय पहले से ही तनावग्रस्त भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में दबाव बदल सकते हैं। जमा पानी का वजन, टूटी-फूटी चट्टानों में पानी का रिसना, कुछ खास स्थितियों में भूकंप का कारण बन सकता है।दशकों से पाकिस्तान को न सिर्फ साफ पानी मिलना बंद हुआ है बल्कि उसकी जगह जहरीला पानी मिल रहा है। बटाला और अमृतसर के पास से शुरू होने वाला हुडियारा नाला,औद्योगिक कचरा और म्युनिसिपल सीवेज लेकर पाकिस्तान में घुसता है,लाहौर की बढ़ती बस्तियों के पास से गुज़रता है और रावी के सूखे तल में गिरता है। यह कई बीमारियों की वजह बनता है।भारत को अपने विकास के लिए काम करने का अधिकार है।नदी को पाइपलाइन की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

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