2,000 से ज्यादा यूपीआई पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज,फोनपे सीईओ ने दिया जवाब,भारतीय ग्राहकों के लिए फ्री रहेगा यूपीआई पेमेंट
2,000 से ज्यादा यूपीआई पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज,फोनपे सीईओ ने दिया जवाब,भारतीय ग्राहकों के लिए फ्री रहेगा यूपीआई पेमेंट

09 Aug 2026 |   65



 

नई दिल्ली।भारत में यूपीआई इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है।यूपीआई पेमेंट पर संभावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर)को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही चर्चा के बीच फोनपे के सीईओ और फाउंडर समीर निगम ने साफ कर दिया है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। 

फोनपे के सीईओ समीर निगम ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यूपीआई भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पहले भी मुफ्त था और आगे भी मुफ्त रहेगा।अगर आप किसी दुकान पर सामान खरीदने,बिल भरने,मोबाइल रिचार्ज करने या किसी व्यक्ति को पैसे भेजने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, तो मौजूदा प्रस्ताव के तहत आपको अलग से ट्रांजैक्शन फीस देने की जरूरत नहीं होगी।

बता दें कि यूपीआई से जुड़े संभावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर इसलिए भ्रम पैदा हुआ,क्योंकि सरकार की ओर से कानून में बदलाव का रास्ता साफ किया गया है,इसके तहत कुछ चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जा सकता है। संभावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ बिजनेस या मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की चर्चा है।हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला चार्ज नहीं होता।यह मूल रूप से उस व्यापारी या कारोबारी से जुड़ा शुल्क है,जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है। इसलिए सरकार और पेमेंट इंडस्ट्री की चर्चाओं के बावजूद आम यूपीआई यूजर के लिए पेमेंट फीस लागू होने की बात नहीं कही गई है।

फोनपे सीईओ समीर निगम के बयान के बाद पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया(पीसीआई)ने भी इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की है।पीसीआई ने कहा कि जहां मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू हो सकता है, वहां यह पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए अलग से पैसे देने होंगे।पीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे व्यापारी और किराना दुकानदारों को यूपीआई स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट देने की जरूरत नहीं होगी। यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देशभर में लाखों छोटे दुकानदार रोजाना छोटे-छोटे भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं।

बता दें कि जब कोई ग्राहक डिजिटल माध्यम से किसी दुकान या कंपनी को भुगतान करता है,तो उस पेमेंट को प्रॉसेस करने में बैंक, पेमेंट कंपनी और अन्य तकनीकी संस्थाओं की भूमिका होती है।इसके बदले व्यापारी से एक शुल्क लिया जा सकता है, जिसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट(एमडीआर)कहा जाता है। कार्ड पेमेंट में एमडीआर पहले से एक जाना-पहचाना मॉडल है, लेकिन यूपीआई के मामले में लंबे समय से ज्यादातर ट्रांजैक्शन बिना एमडीआर के होते रहे हैं।यूपीआई को 2016 में लॉन्च किया गया था और पिछले कुछ सालों में यह भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक इसका इस्तेमाल करते हैं।

सरकार की ओर से कानून में प्रस्तावित बदलाव के पीछे एक बड़ा सवाल यूपीआई के पूरे सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का भी है।यूपीआई नेटवर्क को चलाने के लिए लगातार तकनीक,साइबर सिक्योरिटी,फ्रॉड रोकने की व्यवस्था,ग्राहक सहायता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश करना पड़ता है। पिछले लगभग एक दशक में बैंक, फिनटेक कंपनियां,एनपीसीआई और आरबीआई समेत पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े संस्थान इस सिस्टम को विकसित करने में लगातार निवेश करते रहे हैं,लेकिन यूपीआई की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ इन सेवाओं को चलाने की लागत भी बढ़ रही है।ऐसे में इंडस्ट्री में यह चर्चा चल रही है कि भविष्य में बड़े और अधिक मूल्य वाले कारोबारी ट्रांजैक्शन से कुछ राजस्व हासिल किया जा सकता है, जबकि आम लोगों के लिए यूपीआई को मुफ्त रखा जाए।

प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये की सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे डेली के ज्यादातर छोटे भुगतान प्रभावित नहीं होंगे।दूध,सब्जी,किराना,छोटी खरीदारी या ऑटो-टैक्सी का किराया जैसे सामान्य भुगतान आम तौर पर इस सीमा के नीचे होते हैं।इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति को पेमेंट को भी संभावित एमडीआर व्यवस्था से बाहर रखने की बात कही गई है।अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त,परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को यूपीआई से पैसे भेजता है, तो उस पर इस प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज का असर नहीं पड़ेगा।

हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत की दर अभी अंतिम चार्ज नहीं मानी जानी चाहिए। अंतिम नियमों में किन कारोबारियों पर एमडीआर लागू होगा, 2,000 रुपये की सीमा कैसे लागू होगी,छोटे व्यापारियों को किस तरह छूट मिलेगी और शुल्क की अधिकतम सीमा क्या होगी, यह सब सरकार की अंतिम अधिसूचना और नियमों से स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल यूपीआई यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं है।

मौजूदा तस्वीर यही है कि यूपीआई पेमेंट आम ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा,जबकि संभावित एमडीआर का फोकस चुनिंदा बड़े कारोबारी ट्रांजैक्शन पर हो सकता है।सरकार और पेमेंट इंडस्ट्री का लक्ष्य एक तरफ यूपीआई की मुफ्त और आसान पहुंच को बनाए रखना है, तो दूसरी तरफ इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी में निवेश के लिए टिकाऊ मॉडल तैयार करना है। अंतिम नियम सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि किन कारोबारियों और किन ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू होगा,लेकिन आम यूपीआई यूजर के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि यूपीआई से पैसे भेजने या भुगतान करने पर सीधे कोई चार्ज नहीं लगाया जा रहा है।

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