ईरान पर ट्रंप की धमकी का तेल बाजार पर असर,कच्चा तेल 2% से ज्यादा उछला, ब्रेंट 94 डॉलर के करीब पहुंचा
ईरान पर ट्रंप की धमकी का तेल बाजार पर असर,कच्चा तेल 2% से ज्यादा उछला, ब्रेंट 94 डॉलर के करीब पहुंचा

21 Aug 2026 |   23



 

नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से ईरान का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी के बाद तेल की कीमतें करीब एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।ईरान पर बढ़ते अमेरिकी दबाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई में बाधा की चिंता के बीच कच्चे तेल की ये कीमतें 2 फीसदी से ज्यादा बढ़कर करीब एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंचीं हैं।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.16 डॉलर यानी 2.4 फीसदी बढ़कर 93.78 डॉलर प्रति बैरल 

ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.16 डॉलर यानी 2.4 फीसदी बढ़कर 93.78 डॉलर प्रति बैरल हो गई।ये 24 जुलाई के बाद ब्रेंट क्रूड का सबसे ऊंचा स्तर है।वहीं सितंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 2 डॉलर यानी 2.3 फीसदी बढ़कर 87.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ये भी 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है।

ईरान का साथ देने वाले देशों को ट्रंप की चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार शाम ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन देशों को चेतावनी दी,जो किसी भी तरह से तेहरान की मदद कर रहे हैं।ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर आर्थिक कार्रवाई और अलग-थलग करने की बात कही है।अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वह सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और सरकार की आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी देंगे।

होर्मुज से तेल सप्लाई पर असर

ईरान में 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद युद्ध शुरू हुआ था।इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही को रोक दिया और पश्चिम एशिया में ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। इससे दुनिया के कई हिस्सों में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है।यहां लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

तेल ट्रेडिंग सलाहकार Ritterbusch and Associates ने एक नोट में कहा...

तेल ट्रेडिंग सलाहकार Ritterbusch and Associates ने एक नोट में कहा कि फिलहाल ट्रंप की नई धमकियों से ईरान के अपने सबसे बड़े दबाव के साधन यानी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण छोड़ने की संभावना कम है। इसके लिए अमेरिका की ओर से बड़े समझौते की जरूरत पड़ सकती है।ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। Ritterbusch and Associates ने कहा कि फिलहाल इस संकट का कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है और युद्ध से पहले के स्तर के आसपास कीमतों के लौटने की उम्मीद भी अभी नहीं दिख रही है।

होर्मुज से तेल की आवाजाही अब भी सामान्य से काफी कम

बीते दो दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या एक दिन पहले के मुकाबले लगभग समान रही। हालांकि युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में यहां से जहाजों की आवाजाही अब भी काफी कम है। युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता था।संयुक्त अरब अमीरात ने इस सप्ताह ईरान के साथ सभी वित्तीय और आर्थिक लेनदेन को अगले आदेश तक रोक दिया है।इससे संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों पर और असर पड़ने की आशंका है।

रिफाइंड ईंधन की सप्लाई पर भी असर

ईरान युद्ध का असर सिर्फ कच्चे तेल की सप्लाई पर नहीं पड़ा है।रिफाइंड ईंधन की उपलब्धता और उसके भंडार पर भी दबाव बढ़ा है। रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की उपलब्धता कम होने से ईंधन सप्लाई प्रभावित हो रही है।अमेरिकी Energy Information Administration के मुताबिक डीजल और हीटिंग ऑयल जैसे डिस्टिलेट ईंधनों का भंडार लगातार तीसरे सप्ताह घटा है।हालांकि अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार उम्मीद के उलट 44 लाख बैरल बढ़ गया।

StoneX के एनर्जी एनालिस्ट Alex Hodes के मुताबिक...

StoneX के एनर्जी एनालिस्ट Alex Hodes के मुताबिक ईरान की मदद करने वाले देशों के खिलाफ ट्रंप की धमकी अमेरिका और चीन के रिश्तों के लिए संवेदनशील मुद्दा बन सकती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि चीन ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है।

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