संघ प्रमुख मोहन भागवत के कनाडा दौरे के समर्थन में आए वहां के 100 से अधिक संगठन,बैन की मांग ठुकराने को कहा
संघ प्रमुख मोहन भागवत के कनाडा दौरे के समर्थन में आए वहां के 100 से अधिक संगठन,बैन की मांग ठुकराने को कहा

19 Aug 2026 |   26



 

नई दिल्ली।कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और उनकी सरकार के सीनियर मंत्रियों को लेटर लिखा है।इन संगठनों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के कनाडा दौरे को अपना सपोर्ट दिया है।उन्होंने कार्नी सरकार से कहा है कि भागवत को कनाडा में आने देने या उन्हें रोकने का फैसला जो सबूत और सही कानूनी प्रक्रिया हैं,उनके आधार पर होना चाहिए,न कि किसी राजनीतिक दबाव में। 

बता दें कि यह सपोर्ट ऐसे समय में आया है जब एनडीपी सांसद जेनी क्वान और हीदर मैकफर्सन समेत कई लोग संघ प्रमुख मोहन भागवत को कनाडा आने से रोकने और उन्हें देश में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग कर रहे हैं।यह लेटर कनाडाई पीएम मार्क कार्नी,सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी अनांदसांगरी,इमीग्रेशन मंत्री लीना मेटलेज डियाब और विदेश मंत्री अनिता आनंद को भेजा गया है।

क्या लिखा है लेटर में

इस लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले संगठनों ने कहा है कि मोहन भागवत का प्रस्तावित दौरा कनाडा के हिंदू समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।कनाडा में हिंदू समुदाय के 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं।संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भारत का एक बड़ा संगठन बताया है,जो समाज सेवा, सामाजिक काम,सांस्कृतिक गतिविधियों और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा के लिए जाना जाता है।

इन संगठनों ने मोहन भागवत को कनाडा आने से रोकने की कोशिश का किया कड़ा विरोध

इन संगठनों ने मोहन भागवत को कनाडा आने से रोकने की कोशिश का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि भागवत पर लगाए गए आरोपों के पीछे भरोसेमंद सबूत होने चाहिए,लेटर में संगठनों ने उन दावों पर भी सवाल उठाया, जिनमें कहा गया है कि मोहन भागवत का इतिहास नफरत भरे भाषण देने का रहा है,उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का समर्थन किया,लोगों को निशाना बनाकर डराया या आपराधिक संगठनों और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से संबंध रखे।संगठनों ने कहा कि ये बहुत गंभीर आरोप हैं और साफ, भरोसेमंद और स्वतंत्र रूप से जांचे जा सकने वाले सबूत के बिना इन्हें सच नहीं माना जाना चाहिए।लेटर में कनाडा सरकार से पूछा गया है कि इन आरोपों के पीछे क्या सबूत हैं।अगर भरोसेमंद सबूत मौजूद हैं तो उनकी जांच उचित कानूनी और सरकारी प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए।

लेटर पर साइन करने वाले संगठनों ने इस चिंता को भी खारिज किया...

लेटर पर साइन करने वाले संगठनों ने इस चिंता को भी खारिज किया कि मोहन भागवत के कनाडा आने से सामाजिक अशांति हो सकती है या लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।उन्होंने पूछा कि ऐसे कौन से खास मामले हैं, जिनसे साबित होता है कि मोहन भागवत या RSS ने कनाडा में सामाजिक अशांति पैदा की है।साथ ही उन्होंने पूछा कि ऐसी कौन सी ठोस जानकारी है,जिससे पता चलता है कि उनके दौरे से लोगों की सुरक्षा को खतरा होगा।

संगठनों ने कहा कि बिना पक्के सबूत के मोहन भागवत को रोकने का असर कनाडा के हिंदू समुदाय पर भी पड़ सकता...

संगठनों ने कहा कि बिना पक्के सबूत के मोहन भागवत को रोकने का असर कनाडा के हिंदू समुदाय पर भी पड़ सकता है, इससे कुछ लोगों को लग सकता है कि कनाडाई हिंदुओं और उनके संगठनों के साथ दूसरों से अलग व्यवहार किया जा रहा है।लेटर में इस पूरे मामले को कनाडा के बहुसांस्कृतिक समाज,धार्मिक आजादी और कानून के सामने बराबरी के सिद्धांतों से जोड़ा गया है,इसमें कहा गया है कि दूसरे धर्मों और संस्कृतियों के कनाडाई लोगों की तरह हिंदुओं को भी सम्मान, सुरक्षा,अपनी बात कहने की आजादी,शांतिपूर्ण तरीके से संगठन बनाने और बराबरी का अधिकार है।हालांकि संगठनों ने यह भी माना कि भागवत की आलोचना करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पूरी तरह जायज है,उनका कहना है कि राजनीतिक असहमति और शांतिपूर्ण विरोध वैध हैं, लेकिन केवल आरोपों के आधार पर किसी आने वाले नेता को कनाडा में प्रवेश से रोकना निष्पक्षता और सभी विचारों को जगह देने की भावना पर सवाल खड़े कर सकता है।

कौन कौन से संगठन दे रहे सपोर्ट

लेटर में 100 से ज्यादा संगठनों और सामुदायिक समूहों के नाम हैं,इनमें कनाडा इंडिया फाउंडेशन,कनाडा इंडिया ग्लोबल फोरम,कैनेडियन आर्य समाज,ब्रैम्पटन हिंदू सोसाइटी,हिंदू सोसाइटी ऑफ कनाडा,हिंदू मिशन ऑफ कनाडा,हिंदू सभा मंदिर,हिंदू स्वयंसेवक संघ,वीएचपी कनाडा के साथ कई मंदिर,सांस्कृतिक संस्थाएं और सामुदायिक संगठन शामिल हैं।

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