नई दिल्ली।तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है।बुधवार को ओमान की खाड़ी और लाल सागर (रेड सी) में जहाजों पर हुए ताजा हमलों के बाद ऐसा हुआ।इन हमलों ने ग्लोबल शिपिंग रूट के लिए जोखिम की चिंता बढ़ा दी है।वहीं ग्लोबल लीडर्स ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति का संकेत दिया है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल और WTI 84 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।तेल की कीमतें बढ़ने से भारत को सीधे तौर पर नुकसान होगा।
खबरों के मुताबिक...
खबरों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ स्थिति ठीक चल रही है। अमेरिकी सेना का होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा कंट्रोल है।
काफी अहम होंगे अगले कुछ दिन
ग्लोबल ऑयल एक्सपर्ट और Trading.com के सीईओ (ऑस्ट्रेलिया) पीटर मैकगायर ने टाइम्स नाउ डिजिटल को बताया,होर्मुज स्ट्रेट में हालात बिगड़े हैं। ईरान-अमेरिका के बीच जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा है।इससे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।मार्केट सेंटीमेंट में कीमतों को लेकर डर है।ट्रेडर्स संभावित रूप से ऊंची कीमतों के लिए तैयार हो रहे हैं,इसलिए अनिश्चितता बनी हुई है।कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या कीमतें फिर से 100 डॉलर तक जा सकती हैं।अगले कुछ दिन अहम होंगे।किसी भी तरह का समाधान कीमतों को तय करेगा।एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने साल की तीसरी तिमाही के लिए तेल की कीमतों का अपना अनुमान बढ़ा दिया है। उसे उम्मीद है कि अगस्त भर होर्मुज स्ट्रेट से तेल की शिपमेंट पर काफी पाबंदियां जारी रहेंगी।
इसलिए पैदा हो गया है डर
अमेरिकी एजेंसी ने 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान 81.91 डॉलर से बढ़ाकर 86.81 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 80.88 डॉलर प्रति बैरल लगाया गया। यह पिछले महीने EIA के 76.26 डॉलर के अनुमान से ज्यादा है।जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल इसलिए आया है क्योंकि मिडिल ईस्ट में शिपिंग पर हमलों ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत में किसी समाधान और तनाव कम होने की उम्मीदों पर चिंता बढ़ा दी है।
एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि जियोपॉलिटिकल जोखिम और शिपिंग पर हमले तेल की कीमतों को ऊपर ले जा रहे हैं। होर्मुज में रुकावटों से क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर तक पहुंचने का डर पैदा हो गया है।
भारत पर पड़ेगा सीधा असर
क्रूड की कीमत बढ़ने का भारत पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल और करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) तेजी से बढ़ेगा। इसके चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई और परिवहन महंगा होगा। साथ ही खाने-पीने की चीजें और दैनिक उपभोग की वस्तुओं में महंगाई बढ़ेगी। सरकारी तेल कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होगा। सरकार का सब्सिडी बोझ बढ़ने से राजकोषीय स्थिति पर भी दबाव पड़ेगा।