यूपीआई की रफ्तार पर लगा ब्रेक,ट्रांजैक्शन ग्रोथ 33% से घटकर हुआ 23%,बड़े पेमेंट पर लग सकता है चार्ज
यूपीआई की रफ्तार पर लगा ब्रेक,ट्रांजैक्शन ग्रोथ 33% से घटकर हुआ 23%,बड़े पेमेंट पर लग सकता है चार्ज

10 Aug 2026 |   102



 

नई दिल्ली।देश में यूपीआई से होने वाले पेमेंट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है,लेकिन अब इसकी ग्रोथ की रफ्तार पहले जैसी तेज नहीं रही।वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तो बढ़ा है,लेकिन इसकी ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले काफी धीमी हुई है।खास बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय आया है,जब यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने को लेकर बहस तेज है और बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज का रास्ता खुलने की चर्चा हो रही है।

वॉल्यूम ग्रोथ 33.5% से घटकर 23.5%

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच यूपीआई के जरिए लगभग 92 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए।पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 74.5 बिलियन था। यानी इस बार ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 23.5 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई। हालांकि पिछले साल अप्रैल-जुलाई के दौरान वॉल्यूम ग्रोथ 33.5 फीसदी रही थी। इस तरह ग्रोथ रेट में सीधे 10 परसेंटेज पॉइंट की गिरावट आई है।

दो साल से धीमी हो रही यूपीआई की ग्रोथ

यह सुस्ती केवल चार महीनों तक सीमित नहीं दिख रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूपीआई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगभग 41 फीसदी बढ़ा था,जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रोथ करीब 30 फीसदी रह गई। हालांकि पूरे वित्त वर्ष और चार महीने के आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।फिर भी ट्रेंड बताता है कि यूपीआई के विस्तार की रफ्तार धीरे-धीरे कम हुई है।

वैल्यू ग्रोथ करीब 20% पर

वॉल्यूम की ग्रोथ धीमी हुई है,लेकिन ट्रांजैक्शन वैल्यू की तस्वीर अलग है। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू की ग्रोथ करीब 20 फीसदी रही। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में वैल्यू ग्रोथ 18.5 फीसदी थी। यानी लोग यूपीआई का इस्तेमाल लगातार कर रहे हैं और ट्रांजैक्शन की कुल रकम भी बढ़ रही है।

एमडीआर को लेकर क्यों बढ़ी बहस

यूपीआई पर 2020 से जीरो एमडीआर की व्यवस्था रही है। एमडीआर वह फीस होती है,जो मर्चेंट डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले बैंक या पेमेंट कंपनी को देता है। फिनटेक और पेमेंट कंपनियों का कहना है कि जीरो एमडीआर की वजह से उन्हें नए कस्टमर जोड़ने,कैशबैक देने और ज्यादा मर्चेंट को नेटवर्क से जोड़ने पर खर्च करने के लिए कम पैसा मिलता है। दूसरी तरफ जीरो एमडीआर के समर्थकों का तर्क है कि यूपीआई जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सेवा को सस्ता रखना नए यूजर्स को जोड़ने में मदद करता है।

2,000 रुपये से बड़े मर्चेंट पेमेंट पर लग सकता है चार्ज

लोकसभा में 6 अगस्त को टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026 पास किया है,जिसके बाद कुछ यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू करने का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार 2,000 रुपये से ज्यादा के बड़े मर्चेंट पेमेंट पर लगभग 0.25 फीसदी से 0.40 फीसदी तक एमडीआर की व्यवस्था पर विचार कर सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक से सीधे यह पैसा वसूला ही जाएगा, क्योंकि एमडीआर मूल रूप से मर्चेंट पर लगने वाला चार्ज है और इसकी अंतिम व्यवस्था अभी तय होनी बाकी है।

बता दें कि भारत में पेमेंट का तरीका बदलने के बाद अब यूपीआई की नजर विश्व पर है।एनपीसीआई अगले 10 साल में इसे 15 से 20 मार्केट्स तक पहुंचाने की संभावनाएं देख रहा है। इसमें विदेशों में रहने वाले 35 मिलियन भारतीय बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

More news