अलीगढ़।स्मार्ट मीटर लगाने का सीना ठोककर दावा करने वाला बिजली विभाग अपने सिस्टम में जलेबी की तरह उलझ गया है।आलम यह है कि मीटर तो बदल दिए गए,मगर बिल गायब हो गए।नए मीटर के बाद रीडिंग और बैलेंस को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की हालत बनी हुई है।कई उपभोक्ताओं का फरवरी का बिल अभी तक नहीं आया।अधिकारी स्पष्ट नहीं बता पा रहे कि नया मीटर पोस्टपेड है या प्रीपेड।अगर प्रीपेड है तो ऑनलाइन बैलेंस क्यों नहीं दिखाई दे रहा और पोस्टपेड है तो बिल क्यों नहीं मिल रहा है।
अलीगढ़ शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं।कुछ इलाकों में डेढ़ से दो महीने पहले बदले गए स्मार्ट मीटरों के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को अब तक बिजली का बिल नहीं मिला है।इससे उपभोक्ता न सिर्फ असमंजस में हैं, बल्कि अपने वास्तविक बकाए को लेकर भी अनिश्चितता की हालत में हैं।उपभोक्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं,लेकिन हर बार बस एक ही जवाब मिल रहा है,मीटर अब प्रीपेड हो चुका है, बिल जल्द मोबाइल पर आ जाएगा,जबकि जमीनी हकीकत इससे ठीक उल्टा है न तो मोबाइल पर कोई बिल आ रहा है और न ही ऑनलाइन पोर्टल पर कोई नई जानकारी दिख रही है।पोर्टल पर अब भी पुराना भुगतान ही दिख रहा है।उपभोक्ता यह समझ ही नहीं पा रहे कि उनका वास्तविक बकाया कितना है।
मीटर बदलने के साथ ही बिना स्पष्ट जानकारी दिए पोस्टपेड से प्रीपेड सिस्टम में शिफ्ट कर दिया गया। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस बदलाव को लेकर न तो पहले जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही बाद में कोई स्पष्ट गाइडलाइन दी गई।आलम यह है कि उपभोक्ता अपने ही कनेक्शन के नियम समझने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
सबसे अधिक नाराजगी तब सामने आ रही है जब अचानक नेगेटिव बैलेंस दिखाकर कनेक्शन काट दिए जा रहे हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार 31 हजार से अधिक कनेक्शन इसी आधार पर काटे जा चुके हैं।उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब बिल ही नहीं मिला तो बकाया कैसे तय हो गया। विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले में स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं।
मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल का कहना है कि स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड करने की प्रक्रिया लखनऊ स्तर से हो रही है। ऑनलाइन पोर्टल पर बैलेंस दिखाई दे जाएगा। इस संबंध में उपभोक्ताओं को जानकारी दी जा रही है।