अल नीनो के असर से मथुरा में कम बारिश के आसार,सूखे की आशंका पर कृषि विभाग कर रहा किसानों को अलर्ट
अल नीनो के असर से मथुरा में कम बारिश के आसार,सूखे की आशंका पर कृषि विभाग कर रहा किसानों को अलर्ट

15 May 2026 |   28



 

मथुरा।मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण मथुरा में कम बारिश और सूखे की आशंका जताई है।मौसम विभाग की ओर से अल नीनो का अलर्ट जारी किया गया है,जिससे कृषि विभाग किसानों को अलर्ट कर रहा है।उत्तर प्रदेश में सूखे के दृष्टिगत 18 जिले अति संवेदनशील हैं,जिनमें मथुरा भी शामिल है।ऐसे में कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाएगा और उनको कम वर्षा या कम नमी वाली दलहन-तिलहन फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा।मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों में कम पानी की फसलें और उनकी प्रजातियोंं का चुनाव करना चाहिए,जिससे भूगर्भ जलस्तर का दोहन कम हो और फसल पैदावार बढ़े। इस प्रकार किसान को कम लागत में अधिक लाभ मिल सकेगी।

जिले में बहुतायत होती है धान की फसल

मथुरा जिले में धान की फसल बहुतायत में होती है,जो पूरी तरह नहर और भूगर्भ स्रोत पर आधारित है।मौसम वैज्ञानियों द्वारा इस वर्ष कम वर्षा का अनुमान लगाया जा रहा है।ऐसे में कृषि विभागों ने किसानों को अलर्ट जारी किया है कि धान की कम समय और कम पानी में होने वाली प्रजातियों की चयन करें।हालांकि जिले में अधिक पानी की आवश्यकता वाली धान की फसल निकल चुकी है और अब खरीफ में कम पानी की आवश्यकता वाली दलहन और तिलहन की बोआई और पैदावार हो रही है।

जिला कृषि अधिकारी ने ये बताया 

इस बारे में जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली प्रजातियों की जानकारी दी जाएगी। बाजारा, ज्वार, मूंग एवं उर्द की प्राथमिकता दी जाएगी।नमी संरक्षण के लिए खेतों में मेड़बंदी कर जल संरक्षण एवं फसल अवशेषो से गहरी जुताई द्वारा मिट्टी में नमी बनाए रखने का सुझाव दिया जाएगा।डिप एवं स्प्रलिंग सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। बाजरा, अरहर, ज्वार मूग, तिल उर्द का सुझाव दिया जाएगा, जिससे किसानों का जोखिम कम होगा। इन्हीं बोआई को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बाजरा की पैदावार है फायदे का सौदा

कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक रविंद्र राजपूत ने बताया कि वैज्ञानिक विधि के अनुरूप सिंचाई करें और लगातार खेतों में पानी भरे रहने अच्छा है कि ट्यूबवैल से पानी तब भरा जाए, जब खेत एक दिन सूख जाए।

वर्षा में देरी हुई तो इन फसलों की वैकल्पिक व्यवस्था

उप निदेशक कृषि वसंत कुमार दुबे ने बताया है कि धान के 104604 हेक्टेयर क्षेत्रफल के स्थान पर 75230 हेक्टेयर में कम अवधि में तैयार की जाने वाली धान की प्रजातियां साकेत-4, मनहर तथा अरहर की बुवाई कराई जाएगी।धान के अवशेष रहे क्षेत्रफल में बाजरा,ज्वार,उर्द,मूंग व अरहर फसलों के क्षेत्रफल में वृद्धि की जाएगी,जो कम अवधि में पककर तैयार हो जाए।

कम बारिश के दुष्प्रभाव

अंकुरण प्रभावित होना,पौधा का सूखना,खरपतवार वृद्धि,पोषक तत्वों का अवशोषण कम होना और उत्पादन में गिरावट।

 वर्षा सामान्य हुई तो धान की भी तैयारी

बता दें कि मानसून सामान्य रहा तो किसान धान की पैदावार समय से करेंगे।खाद-बीज विक्रेताओं की दुकानों पर धान का बीज खरीदने को किसानों की भीड़ लग रही है।किसान पहले से ही इंतजाम करके रख रहे हैं।धान की फसल की रोपाई में अभी समय बाकी है,लेकिन धान की रोपाई के लिए अभी से किसानों ने नर्सरी की तैयारी शुरू कर दी है। सिंचाई संसाधन मौजूद होने पर कुछ किसानों ने तो धान की पौध तैयार कर ली है।

किसान जितेंद्र सिंह ने ये बताया 

सुरीर के गांव भालई के किसान जितेंद्र सिंह ने बताया कि धान की रोपाई समय से होने पर अच्छी उपज होने की संभावना बनी रहती है,जिससे नर्सरी की तैयारी की जा रही है। धान की उपज के लिए बाजार में विभिन्न प्रजातियों के बीज दुकानदारों द्वारा बेचा जा रहा है।सुरीर, टैंटीगांव, लोहई, हरनौल व कराहरी समेत कस्बों में धान के बीज की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में किसान दुकानों पर पहुंच रहे हैं।

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