ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है।इस मुद्दे पर अब पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को घेरा है।मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अखिलेश यादव को इस अभद्र टिप्पणी के लिए तत्काल ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए।मायावती ने सपा को जातिवादी और ब्राह्मण विरोधी बताया।उन्होंने दावा किया कि केवल बसपा में ही ब्राह्मणों का हित सुरक्षित है।
पूर्व सीएम मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र,अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी से हर तरफ भारी आक्रोश है। मायावती ने कहा कि पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि समाज के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है।
अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए मायावती ने कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले पर खामोशी बेहद चिंताजनक है।सपा मुखिया की चुप्पी की वजह से यह विवाद और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है और सामाजिक स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। मायावती ने सलाह दी कि सपा मुखिया को तत्काल इसका संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से क्षमा याचना और पश्चाताप कर लेना चाहिए।
मायावती ने कहा कि इस प्रकरण से एक बार फिर साबित हो गया है कि सपा का चरित्र नहीं बदला है।दलितों,अति-पिछड़ों और मुस्लिम समाज की तरह सपा का ब्राह्मण विरोधी चेहरा भी अब और गहरा होकर सामने आया है।मायावती ने वर्तमान सरकार (बीजेपी) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज में मौजूदा सरकार के रवैये को लेकर भी जबरदस्त नाराजगी है,जो किसी से छिपी नहीं है।
मायावती ने बसपा के शासनकाल की याद दिलाई। मायावती ने कहा कि बसपा ने हमेशा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी और सरकार में भरपूर आदर-सम्मान दिया है। बसपा में यूज एंड थ्रो की राजनीति नहीं होती, बल्कि यहां सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
बता दें कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम मायावती ने अकेले ही उतरने का ऐलान किया है। 2007 की तरह दलित ब्राह्मण गठजोड़ पर मायावती की नजरें हैं। पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस कर मायावती ने ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने के लिए कई ऐलान भी किए थे।