डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बाद भी 1 रुपये के सिक्के का कायम है दबदबा,इन इलाकों में बोलती है तूती
डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बाद भी 1 रुपये के सिक्के का कायम है दबदबा,इन इलाकों में बोलती है तूती

27 Jun 2026 |   29



 

नई दिल्ली।देश में डिजिटल पेमेंट का चलन हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है,लेकिन 1 रुपये का सिक्का देश में सबसे ज्यादा चलन में रहने वाला सिक्का बना हुआ है।एक दशक से भी अधिक समय से इसकी बादशाहत चली आ रही है। हालांकि इसकी वैल्यू में लगातार गिर रही है।वैल्यू में लगातार गिरावट के बावजूद 1 रुपये के सिक्के का जलवा कायम है। दिलचस्प बात है कि इसमें 99 रुपये, 199 रुपये की कीमतों की अहम भूमिका है।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक एक दशक से भी ज्यादा समय से सिक्कों के चलन में इसका रहा है दबदबा

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक दशक से भी ज्यादा समय से सिक्कों के चलन में 1 रुपए के सिक्के का दबदबा रहा है।आरबीआई की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 तक 1 रुपये के करीब 5,499 करोड़ सिक्के चलन में थे। चलन में मौजूद कुल सिक्कों में 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी 38.4 प्रतिशत थी। देश में 50 पैसे, 2 रुपये, 5 रुपये, 10 रुपये और 20 रुपये के सिक्के अभी चलन में हैं।

सबसे बड़ा रुपया

मार्च 2025 में देश में चलन में मौजूद सभी सिक्कों में 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी 39.3 प्रतिशत थी। हालांकि यह ट्रेंड नया नहीं है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014, 2015 और 2016 के आखिर में चलन में मौजूद सभी सिक्कों में 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2016 में, लगभग 4,500 करोड़ 1 रुपये के सिक्के चलन में थे।

जानें बैंकरों का क्या कहना है 

बैंकरों का कहना है कि 1 रुपये के सिक्के हमेशा चलन में बने रहते हैं, यही वजह है कि संख्या के हिसाब से इनका दबदबा बना हुआ है।एक बैंक अधिकारी ने कहा कि अगर समय के साथ चलन में मौजूद सिक्कों की वैल्यू को देखें तो तो 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी घटी है। अब 5 रुपये और 10 रुपये के सिक्कों की हिस्सेदारी ज्यादा है।

1 रुपये के सिक्के की अहमियत

2024 5,29,934 40.0% 5,299
2025 5,38,720 39.3% 5,387
2026 5,49,855 38.4% 5,499

स्रोत: आरबीआई सालाना रिपोर्ट

कहां हो रहा है यूज

19 जून 2026 तक के डेटा के मुताबिक चलन में मौजूद कुल सिक्कों में 5 रुपये और 10 रुपये के सिक्कों की हिस्सेदारी केवल 23.5 प्रतिशत थी, लेकिन कुल वैल्यू में इनका हिस्सा 53.5 प्रतिशत था। यह 22,209 करोड़ रुपये के बराबर है। 

जानें जानकारों क्या कहना है 

जानकारों का कहना है कि 1 रुपये का सिक्का मंदिरों और छोटी वैल्यू वाले लेन-देन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता रहता है। यह खास तौर पर भारत के ग्रामीण इलाकों में चलन में है।यूपीआई ने खासकर शहरों में और रोजमर्रा के पेमेंट के लिए कैश की जरूरत को काफी कम कर दिया है। हालांकि, इसने सिक्कों की जरूरत को खत्म नहीं किया है। दुकानों, बसों,रेहड़ी पटरी वालों और ग्रामीण बाजारों में कैश का इस्तेमाल अभी भी आम है और छुट्टे पैसे का महत्व अभी भी बना हुआ है।

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