लखनऊ अग्निकांड:नक्शा,एन‌ओसी और हर फाइल की होगी जांच,एस‌आईटी खंगालेगी 12 साल का रिकॉर्ड
लखनऊ अग्निकांड:नक्शा,एन‌ओसी और हर फाइल की होगी जांच,एस‌आईटी खंगालेगी 12 साल का रिकॉर्ड

27 Jun 2026 |   19



ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी 

लखनऊ।सूबे की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को दोपहर भीषण अग्निकांड हुआ।एक तीन मंजिला बिल्डिंग में भीषण आग लग गई थी।इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई,जिसमें अधिकांश छात्र थे।लखनऊ अग्निकांड की जांच अब और तेज हो गई है।विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में अपनी पड़ताल तेज करते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण के 50 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया है।अब साल 2014 से 2026 के बीच संबंधित क्षेत्र में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच होगी।

एसआईटी ने एलडीए से पिछले 12 सालों में संबंधित जोन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की मांगी पूरी ड्यूटी की डिटेल

मिली जानकारी के अनुसार एसआईटी ने एलडीए से पिछले 12 सालों में संबंधित जोन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी ड्यूटी की डिटेल मांगी है।एलडीए प्रशासन सभी संबंधित अधिकारियों की सूची तैयार कर जल्द ही एसआईटी को उपलब्ध कराएगा। एसआईटी यह पता लगाएगी कि भवन के निर्माण,नक्से की मंजूरी,उपयोग परिवर्तन,निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान कहीं नियमों की अनदेखी या लापरवाही तो नहीं हुई।

दर्ज होंगे मौजूदा अधिकारियों के बयान

एसआईटी की जांच के अगले चरण में वर्तमान में तैनात एलडीए अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।इनसे बिल्डिंग से जुड़े दस्तावेज,जांच रिपोर्ट,नोटिस, कार्रवाई और अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी,इसके बाद उन अधिकारियों को भी तलब किया जाएगा,जो साल 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में तैनात रहे थे। 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

पूर्व अधिकारियों से भी होगी पूछताछ

एसआईटी का मानना है कि पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए केवल वर्तमान अधिकारियों से पूछताछ पर्याप्त नहीं होगी। इसलिए पूर्व में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यदि बिल्डिंग में अनियमितताएं थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।एसआईटी पहले ही फॉरेंसिक,अग्निशमन, बिजली विभाग और अन्य संबंधित विभागों से दस्तावेज जुटा चुकी है।अब जांच का फोकस प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने पर है,यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।

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