इस साल होली पर बरसाना में 14 घंटे दर्शन देंगी राधारानी, लठामार में आने वाली हुरियारों के बनेंगे पास
इस साल होली पर बरसाना में 14 घंटे दर्शन देंगी राधारानी, लठामार में आने वाली हुरियारों के बनेंगे पास

20 Feb 2026 |   11



 

मथुरा।नंदगांव और बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लड्डू और लठामार होली की तैयारियां जोरों पर हैं।हुरियारे प्रेमपगी लाठियों से बचने को ढाल और पाग को संभाल रहे हैं तो हुरियारिनें अपनी लाठियों को तेल पिला रही हैं।होली के रसिया,दोहों और पदों को गाकर हुरियारे अनेक तरह से लठामार होली के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।कोई ढालों को सजा रहा है तो कोई नई धोती बगलबंदी तैयार करा रहा है।युवाओं के साथ बुजुर्ग और बच्चों में भी लठामार होली को लेकर उत्साह है। 

इस साल लड्डू होली और लठामार होली पर राधारानी 14 घंटे दर्शन देंगी।अभी तक राधारानी के दर्शन लगभग साढ़े 11 घंटे होते हैं,लेकिन होली पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देख मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाया गया है।

होली पर भी रोपवे का संचालन जारी रहेगा,लेकिन रोपवे से मंदिर पहुंचने के लिए पहले ही ऑनलाइन टिकट की बुकिंग करानी होगी,इस दिन ऑफलाइन टिकट काउंटर बंद रहेगा। 
नंदगांव और बरसाना के हुरियारों के गोस्वामी समाज पास जारी करेगा,ताकि कोई दूसरा भीड़ में हुरियारा बनकर हुड़दंग न कर सके।

लठामार होली मेला के दौरान घटिया गुलाल की बिक्री को लेकर पुलिस प्रशासन इस बार सख्त रुख अपनाएगा,जो भी दुकानदार नकली गुलाल बेचता पाया गया, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।नंदगांव-बरसाना की लठामार होली खेलने जाने वाले हुरियारों के लिए इस बार प्रशासन ने छह बसों की व्यवस्था की है,जो उन्हें लेकर जाएगी।गुरुवार को लठामार होली की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

बता दें कि ब्रज की संस्कृति राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं की अनुभूति कराती है।यहां साल भर राधारानी और श्रीकृष्ण की लीलाओं का अनुकरण किसी किसी रूप में त्योहार मनाकर किया जाता है।फाल्गुन का महीना ब्रज के लिए खास है।इस महीने में ब्रजमंडल के सभी प्रमुख धार्मिक स्थान मथुरा, वृंदावन,बरसाना,नंदगांव,गोवर्धन,गोकुल,बलदेव,रावल आदि स्थान होली की मस्ती में सराबोर हो जाते हैं।यहां के सभी मंदिरों में होली के पर्दों का गायन होता है और अबीर-गुलाल बरसता है,जिससे यहां आने वाले पर्यटक /श्रद्धालु आस्था के उल्लास में झूम उठते हैं।ब्रज में होली के आयोजनों की शुरुआत बरसाना की होली से होती है।बरसाना की होली को लठामार होली कहा जाता है।लठामार इसलिए क्योंकि इस होली में लठ बरसते हैं,जो एक बार बरसाना की होली देख लेता है वह हर बार यहां होली खेलने आने लगता है।

राधाकृष्ण के अनुराग से रंगी बरसाना की लठामार होली में एक ओर जहां बरसाना की हुरियारिन नन्दगांव के हुरियारों पर अपनी प्रेमपगी लाठियां बरसाने को आतुर हैं।ब्रज में होली की परंपरा कृष्ण कालीन युग से ही चली आ रही है।इस परंपरा का बृजवासी लगातार निर्वहन करते आ रहे हैं। 

इस बार बरसाने की लट्ठमार होली की तैयारियां चरम सीमा पर हैं। बरसाने की होली हुरियारिन अपनी-अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं।दूध,मावा,किशमिश और बादाम खाकर हुरियारिनें अपनी सेहत बना रही हैं।साथ ही कहीं लट्ठ कमजोर न पड़ जाए, इसके लिए तेल मालिश भी कर रही हैं।बरसाने की महिलाएं बाजार से नए नए कपड़े,सोलह शृंगार का सामान और गोटे जड़े लहंगे की भी खरीदारी कर रही हैं। महिलाएं नंदगांव के हुरियारों पर लाठी भांजने के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रही हैं।राधा की गोपियां भगवान श्रीकृष्ण के ग्वालों पर लाठियां का प्रहार करने के लिए उतावली दिख रही हैं।

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