बागपत।उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में बुधवार को साध्वी प्राची पहुंचीं।विश्व हिंदू परिषद की नेत्री साध्वी प्राची ने मंच से कई बयान दिए हैं।भाषण के दौरान साध्वी प्राची ने पश्चिम बंगाल,बाबरी मस्जिद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर बयान दिया है।इस पर आने वाले समय में सियासत गरमा सकती है।
साध्वी प्राची ने कहा-जिस दिन दिल्ली में बैठे गुजराती ठान लेंगे उस दिन ओवैसी की बात छोड़िए जालीदार टोपी भी राधे-राधे...
साध्वी प्राची ने कहा कि जिस दिन दिल्ली में बैठे दो गुजराती ठान लेंगे,उस दिन ओवैसी की तो बात छोड़िए,जालीदार टोपी भी राधे-राधे बोलेगी।पश्चिम बंगाल के विधायक हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद से जुड़े कथित बयान पर पलटवार करते हुए साध्वी प्राची ने कहा कि जैसे हमने साढ़े पांच सौ साल पुराना बाबरी ढांचा हटा दिया था, वैसे ही इस बाबरी को भी धीरे से हटा देंगे। साध्वी प्राची ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद नई बाबरी भी हटा दी जाएगी।
साध्वी प्राची ने कहा-कश्मीरी पंडितों ने हथियार उठा लिए होते तो कश्मीर हिंदुओं से खाली नहीं होता
कश्मीर मुद्दे पर बोलते हुए साध्वी प्राची ने कहा कि अगर कश्मीरी पंडितों ने घाटी में हथियार उठा लिए होते, तो कश्मीर हिंदुओं से खाली नहीं होता। इस बयान को लेकर भी सियासी हलकों में प्रतिक्रिया देखी जा रही है। साध्वी प्राची ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वालों पर भी तीखा हमला बोला है।उन्होंने कहा कि जो लोग आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात करते हैं, उनका न धर्म एक है और न बाप एक है।
हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी के अधिकार छीनना नहीं
साध्वी प्राची ने मोहन भागवत के इस बयान का समर्थन किया। साध्वी प्राची ने कहा कि भागवत ने जनसंख्या को लेकर जो कहा,वो बिल्कुल ठीक है. हमें भी तो अपनी जनसंख्या बढ़ाने का हक है।साध्वी प्राची ने कहा कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है।भारत का संविधान सभी को समान अधिकार देता है। देश की एकता इसी विविधता में समरसता से बनी है।राष्ट्र की सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू
साध्वी प्राची के इन बयानों के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।विपक्षी दलों ने इसे भड़काऊ और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला करार दिया है, जबकि समर्थकों का कहना है कि उन्होंने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के अनुरूप बयान दिया है।फिलहाल बागपत से उठी यह सियासी बयानबाजी राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म देती नजर आ रही है।