वाराणसी।शुक्र ग्रह पश्चिम में उदय हो गए हैं। 59 दिन बाद आज बुधवार से फिर से शहनाई गूंजने लगेगी।सड़कों पर बैंड-बाजा और बारात की रौनक दिखाई देगी,शहनाई के साथ मंडप सजेंगे,वर-वधू सात फेरे लेंगे।सबसे अधिक अप्रैल और मई में शादी के मुहूर्त हैं।दोनों महीने में सात-सात लग्न हैं। जबकि मार्च में दो दिन ही शादी के मुहूर्त हैं।
सनातन धर्म में हर कार्य के लिए अभीष्ट मुहूर्त का होना जरूरी है।शुभ और मांगलिक मुहूर्त के लिए गुरु और शुक्र ग्रह का उदय होना आवश्यक है।इन ग्रहों के अस्त होने पर किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं हो सकते।शुक्र ग्रह के अस्त होने से पिछले साल सात दिसंबर से लग्न ठप थे।
प्रख्यात ज्योतिषविद श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने बताया कि एक फरवरी को शुक्र ग्रह पश्चिम में उदय हुए हैं।वह तीन दिनों तक शैशावस्था में रहे। चार फरवरी से वह पूर्ण कांति रूप में होंगे और इसके साथ ही वैवाहिक व मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
नागेंद्र पांडेय ने बताया कि शुक्र ग्रह के अस्त होने की वजह से खरमास खत्म होने के बाद भी मांगलिक कार्य नहीं हो रहे थे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 12 माह में छह माह ही शुभ और मांगलिक कार्य के लिए होते हैं। बाकी छह माह त्याग के लिए हैं। बिना मुहूर्त के किए गए कार्य में बाधाएं आती हैं।
नागेंद्र पांडेय ने बताया कि फरवरी में 4, 8, 10, 16 और 12 यानी पांच शुभ मुहूर्त हैं।मार्च में दो दिन 3 और 14 शुभ मुहूर्त हैं।अप्रैल में 9, 12, 15, 20, 21, 25 और 30, मई में 1, 3, 9, 12, 13, 14 और 11, जून में 12, 19 और 30, जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12, नवंबर में 7, 20, 21, 24, 27 और 30,दिसंबर में 1, 6, 9, 11 और 13 तक लगन है। उन्होंने बताया कि इन तिथियों के बीच कुछ विवाह के लिए नक्षत्र मिल रहे हैं।