बसपा मुखिया मायावती ने नए UGC नियमों का किया बचाव, कहा-सवर्णों का विरोध नाजायज,लेकिन लागू करने से पहले विश्वास में लेते
बसपा मुखिया मायावती ने नए UGC नियमों का किया बचाव, कहा-सवर्णों का विरोध नाजायज,लेकिन लागू करने से पहले विश्वास में लेते

28 Jan 2026 |   70



ब्यूरो धीरज कुमार द्विवेदी 

लखनऊ।यूजीसी के नए नियमों को लेकर देश भर में जबरदस्त विरोध हो रहा है।उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार,मध्य प्रदेश,राजस्थान,महाराष्ट्र और दिल्‍ली समेत कई राज्‍यों में सवर्ण समाज में जबरदस्त आक्रोश है।इसी बीच नए यूजीसी नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती की प्रतिक्रिया सामने आई है।

बसपा मुखिया मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले UGC के नए नियमों का बचाव किया है। मायावती ने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी जायज नहीं है,हालांकि मायावती ने चेतावनी दी कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बुधवार को मायावती ने सिलसिलेवार कई पोस्ट की।मायावती ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 को जातिवादी मानसिकता वाले लोगों द्वारा गलत तरीके से भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।

मायावती ने कहा,सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को हल करने के लिए इक्विटी कमेटियों के गठन के नए UGC नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध केवल सामान्य वर्ग के वे लोग कर रहे हैं जिनकी जातिवादी मानसिकता है और वे इन्हें साजिश और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं।यह बिल्कुल भी उचित नहीं है।

मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना ​​है कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाता तो बेहतर होता है।सरकारों और संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कदम देश में सामाजिक तनाव का कारण न बनें। मायावती ने दलितों और पिछड़े वर्गों से भी अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों के शिकार न बनें।

मायावती ने कहा,ऐसे मामलों में दलितों और OBC को भी अपने ही स्वार्थी और बिके हुए नेताओं के भड़काऊ बयानों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए,जो उनकी आड़ में गंदी राजनीति करते रहते हैं।इन वर्गों को सतर्क रहना चाहिए।

बता दें कि यूजीसी ने 13 जनवरी को नए नियमों को अधिसूचित किया,जिसमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भेदभाव की शिकायतों को देखने और समावेश को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटियों का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है।नियमों के अनुसार इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए। 2026 के नियम यूजीसी के 2012 के इक्विटी नियमों की जगह लेते हैं,जो काफी हद तक सलाहकारी प्रकृति के थे।इस कदम से उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है।इन चिंताओं को दूर करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि नए ढांचे के तहत कोई उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा।प्रधान ने कहा,मैं सभी को विनम्रतापूर्वक भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर नियम का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा।

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