बाराबंकी।उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर घाघरा नदी पर बने संजय सेतु की मरम्मत के लिए दो महीने के लिए यातायात पूरी तरह से बंद रहेगा।इससे लखनऊ से बहराइच,श्रावस्ती,गोंडा और बलरामपुर आने और जाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।यातायात रोकने की संभावित तारीख 17 फरवरी तय की गई है।पुल की मरम्मत के दौरान लखनऊ से नेपाल,गोंडा,बहराइच,श्रावस्ती और बलरामपुर को आना-जाना बंद रहेगा।बहराइच और श्रावस्ती के वाहनों को सीतापुर से चहलारीघाट और गोंडा और बलरामपुर के वाहनों को अयोध्या होकर से लखनऊ के लिए संचालित करने की व्यवस्था रहेगी।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि संजय सेतु लगभग 45 साल पुराना है।यह नेपाल और पांच जिलों के आवागमन का एक मात्र मार्ग है।उन्होंने बताया कि संजय सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरारें आ गई हैं,इस पुल में लगी सभी 128 वियेरिंग भी डैमेज हो गई है। इसके मद्देनजर एडीजी यातायात से बातचीत हुई है। प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी से इस बारे में शुक्रवार को बातचीत तय है।
नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि श्रीलोधेश्वर महादेवा के मेले के मद्देनजर अब 17 फरवरी से यातायात को बंद करने पर सैद्धांतिक सहमति बनाई जा रहीं है।डीएम गोंडा ने सेतु पर यातायात रोके जाने के दौरान पोंटून पुल समान्तर पर बनाए जाने का प्रस्ताव दिया है। इस पर भी विचार किया जा रहा है। यातायात रोके जाने के दौरान डायवर्जन लागू होगा।
डीएम शशांक त्रिपाठी ने बताया कि एनएचएआई 17 फरवरी से घाघरा नदी के संजय सेतु में मेजर मरम्मत करने जा रहा है। करीब दो माह की यातायात बंदी के दौरान संबंधित जिलों के वाहनों को महाकुंभ के दौरान किए गए डायवर्जन व्यवस्था को प्रभावी कराया जाएगा।इससे बहराइच व श्रावस्ती के वाहनों को सीतापुर से चहलारीघाट और गोंडा व बलरामपुर के वाहनों को अयोध्या के माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था रहेगी।
बता दें कि संजय सेतु का निर्माण साल 1981 में शुरू हुआ था।तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 9 अप्रैल 1981 को इसकी आधारिशला रखी थी। संजय सेतु के बनने में 3 साल लगे और 1984 में इस पुल को लोगों के लिए खोल गया था।तब ये पुल उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा पुल माना जाता था।फिलहाल पुल की हालत काफी जर्जर हो चुकी है और अब इसे बंद करके मरम्मत करना जरूरी है।इस पर गोंडा, बलरामपुर,बहराइच,श्रावसती के यात्रियों और मालवाहक वाहनों का सीधा लोड है।इस रास्ते से नेपाल बार्डर के जिलों के निवासियों और सिद्धार्थनगर से भी लोगों का आवागमन हो रहा है। ऐसे में लगभग 70-75 हजार से अधिक लोगों का रोजाना आवागमन है।