मेरा पति कहां है,मेरे बच्चे कहां हैं,6 साल की बच्ची को याद आई पुनर्जन्म की कहानी
मेरा पति कहां है,मेरे बच्चे कहां हैं,6 साल की बच्ची को याद आई पुनर्जन्म की कहानी

01 May 2026 |   21



 

मथुरा।आप लोगों ने अक्सर बॉलीवुड-हॉलीवुड की फिल्मों में देखा होगा कि मरा हुआ आदमी वापस लौट आता है,उसका पुनर्जन्म होता है।बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म करन-अर्जुन की कहानी बिल्कुल इसी तरह है,जिसमें दोनों हीरो की मौत हो जाती है,लेकिन कुछ समय बाद वह फिर दूसरा जन्म लेते हैं और उन्हें अपना पिछला जन्म याद आ जाता है,लेकिन ये पुनर्जन्म की कहानी सच में भी कई बार हुई है,जिसमें लोगों को अपने पिछला जन्म याद आता है और वह पुरानी जगह लौटने लगते हैं,ऐसी ही एक कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं,जो शायद हिंदुस्तान की सबसे पहली पुनर्जन्म की कहानी है।ये हिंदुस्तान के आजाद होने से पहले की एक पुनर्जन्म की कहानी है,जो बहुत ही प्रचलित है

बार-बार कहती थी,मेरी शादी हो गई है

दिल्ली में एक 6 साल की बच्ची अपने माता-पिता को बार-बार बताती है कि उसकी शादी हो गई है,उसके बच्चे हैं और उसका पति भी है,लेकिन शुरुआत में बच्ची के माता-पिता इसे बचपना समझते हैं,लेकिन बच्ची एक ही चीज बार-बार दोहराती रहती है और वह मथुरा जाने का जिद्द करती है।बच्ची की पुनर्जन्म की खबर उस समय महात्मा गांधी के पास भी पहुंची तो उन्होंने पहले खुद बच्ची से मुलाकात की,जिसका नाम शांति था और फिर एक 15 सदस्ययी कमीशन नियुक्त किया, जो पूरे मामले की जांच कर सके।जांच रिपोर्ट जब महात्मा गांधी के पास पहुंची तो उसके आधार पर यह माना गया कि बच्ची का पुनर्जन्म हुआ है।

लुग्दी का हुआ जन्म, फिर बच्चे के जन्म के दौरान हुई थी मौत

बता दें कि साल 1902 में 18 जनवरी को चतुर्भुज नाम के शख्स के घर पर एक बेटी का जन्म हुआ,जो मथुरा में परिवार के साथ रह रहा था।बच्ची का नाम पड़ा लुग्दी। 10 साल की उम्र में लुग्दी की शादी केदारनाथ चौबे नाम के शख्स के साथ हो गई।केदारनाथ मथुरा में ही कपड़ा की दुकान चलाते थे और यह उनकी दूसरी शादी थी।लुग्दी शादी के बाद जल्द ही प्रेग्नेंट हो गई,लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ,इसके बाद साल 1925 में लुग्दी एक बार फिर प्रेग्नेंट हुई, लेकिन इस बार ऑपरेशन करके केवल बच्चे की जान बचायी जा सकी और लुग्दी की मौत हो गई।लुग्दी की मौत 1925 में 4 अक्टूबर को 10 बजे हुई थी।

लुग्दी की मौत के 10 महीने बाद पैदा हुई थी शांति

लुग्दी की मौत के ठीक 10 महीने 7 दिन बाद दिल्ली में एक लड़की ने जन्म लिया।उसके पिता बाबू रंग बहादुर ने उसका नाम शांति रखा।शांति जब चार साल की हुई तो उसने बोलना शुरू किया और कुछ अजीब सी बातें करने लगी।वह अक्सर पूछती थी की उसका पति कहां है,बच्चे कहां है,जब घरवालों ने शांति से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसका पति मथुरा में कपड़ा का दुकान चलाता है।

डॉक्टर भी नहीं लगा पा रहे थे कुछ पता

शुरुआत में रंग बहादुर ने इसे बच्ची के मन का फितूर समझ कर जाने दिया,लेकिन जैसे-जैसे शांति की उम्र बढ़ती गई और वह उतना ही ज्यादा मथुरा की बात करती थी। 6 साल की उम्र में उसने बताया कि उसकी मौत ऑपरेशन के बाद हुई थी। परिवार ने डॉक्टर को भी दिखाया,लेकिन कुछ खास पता नहीं चला।

9 साल की शांति ने बता दिया पिछले जन्म के पति का नाम

शांति जब 9 साल की हुई तो उसने अपने पिता से मथुरा जाने की इच्छा जाहिर की।हालांकि उसने कभी किसी को अपने पति का नाम नहीं बताया था,लेकिन वह खुद को चौबेन कहकर बुलाती थी।फिर एक दिन रंग बहादुर के घर पर बाबू बिशन चंद नाम के रिश्तेदार आए,उन्होंने शांति से कहा कि तुम अपने पति का नाम बता दो तो मैं तुम्हें मथुरा ले चलूं।फिर शांति ने धीरे से कान में कहा पंडित केदारनाथ चौबे।

बिशन चंद ने केदारनाथ को लिखा लेटर,बताई शांति की कहानी

बिशन चंद ने उस नाम के व्यक्ति का मथुरा में पता लगाया और फिर एक लेटर लिखा,उस लेटर में बिशन चंद ने केदारनाथ चौबे को शांति की पूरी बात बताई।खत पढ़कर केदारनाथ हैरान रह गए।फिर केदारनाथ ने दिल्ली में रह रहे अपने एक रिश्तेदार पंडित कांजीमल से शांति से मिलने को कहा। कांजीमल शांति से मिले,शांति न सिर्फ उन्हें पहचाना बल्कि मथुरा वाले घर की भी जानकारी दी। शांति ने यह भी बताया कि घर के एक कोने में उसने कुछ रुपये छुपा रखा था।

केदारनाथ को शांति ने पहचान लिया

कांजीमल ने यह पूरी कहानी केदारनाथ को बताई।फिर केदारनाथ भी शांति से मिलने पहुंचे।शांति से कहा गया कि यह केदारनाथ के भाई हैं,लेकिन शांति ने केदारनाथ को पहचान लिया‌।फिर केदारनाथ ने शांति से कई सवाल किए।फिर केदारनाथ को शांति ने बताया कि मथुरा के उनके घर के आंगन में कुआं हुआ करता था।साथ ही शांति ने केदारनाथ के बेटे को ये कहते हुए गले लगा लिया कि ये उसका बेटा है।

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