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ग्रेटर नोएडा।नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास चीन की तर्ज पर सेक्टर-7, 8 और 8ए में अंतरराष्ट्रीय बिजनेस और ट्रेड सेंटर बनाने की तैयारी है।अर्न्स्ट एंड यंग (ईएंडयाई) कंपनी ने यमुना विकास प्राधिकरण को परियोजना की स्टडी रिपोर्ट सौंप दी है। इसका प्रस्तुतिकरण जल्द ही दिया जाएगा।
चीन के झेजियांग प्रांत के यीवू शहर में होल सेल मार्केट हैं,जिसे यीवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी भी कहते हैं।इसी तर्ज पर यमुना सिटी में भी अंतरराष्ट्रीय बिजनेस और ट्रेड सेंटर बनाने की तैयारी है।यहां एक ही छत के नीचे देश के सभी प्रकार के उत्पाद उपलब्ध होंगे।लोगों को सामान खरीदने के लिए दूर नहीं जाना होगा। फिलहाल भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए दिल्ली के नेहरू प्लेस,कपड़ों के लिए चांदनी चौक, फर्नीचर के लिए सहारनपुर में बाजार है। जहां देशभर के लोग होल सेल में सामान खरीदते हैं।
एक ही छत के नीचे लोगों को सभी प्रकार के उत्पाद मिल जाएं,फिलहाल देश में इस प्रकार की सुविधा नहीं है,इसके लिए यीडा ने अर्न्स्ट एंड यंग कंपनी से फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार कराई थी,जिसने अपनी स्टडी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इसका जल्द ही उच्च अधिकारियों के सामने प्रस्तुतिकरण दिया जाएगा, इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
चीन में यीवू के नाम से प्रसिद्ध बाजार सुव्यवस्थित व्यवस्था के लिए जाना जाता है।यह छह जोन में बंटा है।पहला डिस्ट्रिक्ट कुल 3.4 लाख वर्गमीटर में वर्ष 2002 में बना है। इसमें फूल, खिलौने,बाल,ज्वैलरी समेत अन्य उत्पाद मिलते हैं। दूसरा डिस्ट्रिक्ट 6 लाख वर्गमीटर में 2004 में बना। यहां रेन कोट, छाता, सूटकेस, ताले, बिजली के उपकरण, किचन, बाथरूम, टेलीकॉम इत्यादि सामान मिलते हैं। तीसरा डिस्ट्रिक्ट 4.6 लाख वर्गमीटर में 2005 में बना है।यहां पेन व स्याही, कांच का सामान, स्टेशनरी, खेल, शीशे, प्रिंटिंग उपकरण, बटन आदि। चौथा डिस्ट्रिक्ट 10.8 लाख वर्गमीटर में 2010 में है। यहां जूते, मोजे, टोपी, दस्ताने, बेल्ट, सिलाई बुनाई के सामान समेत अन्य उत्पाद मिलते हैं। वहीं, पांचवां डिस्ट्रिक्ट 6.4 लाख वर्गमीटर में है। यहां पर ज्वैलरी, बाइक व कार पार्टस इत्यादि हैं। यहां छोटे, मध्यम और बड़े व्यापारियों के लिए थोक खरीद की व्यापक सुविधाएं हैं।
जेवर में नया शहर बस रहा है, यहां अभी अधिकांश भूमि खाली पड़ी है।एयरपोर्ट के नजदीक सेक्टर-7, 8 और 8ए औद्योगिक सेक्टर हैं, जबकि इनके अंदर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी मास्टर प्लान में जगह बनाई गई है। एयरपोर्ट के नजदीक होने से पार्क को 20-20 एकड़ में विकसित करने और इन केंद्रों को बेचने के बजाय किराये पर देने की योजना है,इससे जिस उत्पाद की स्थिति खराब होगी, उसे हटाकर दूसरे उत्पाद को वहां जगह देने में आसानी होगी।
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