नई दिल्ली।भारत और चीन समेत विश्व के कई देशों को कच्चे तेल की सप्लाई करने वाला रूस आज खुद तेल के लिए तरस रहा है।अब पुतिन के देश में यूक्रेन के हमलों से हाहाकार मचा हुआ है।कजाकिस्तान के सामने रूस को हाथ फैलाने पड़ रहे हैं।
रूस में पेट्रोल की भारी किल्लत
यूक्रेन के विनाशकारी ड्रोन हमलों के बाद रूस इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है। पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत और पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों के बीच रूसी सरकार ने अब अपने पड़ोसी देश कजाकिस्तान से भारी मात्रा में गैसोलीन (पेट्रोल) खरीदने के लिए संपर्क किया है।
50 हजार टन मांगा पेट्रोल
रूस ने कजाकिस्तान से लगभग 50,000 टन पेट्रोल की मांग की है,लेकिन कजाकिस्तान इस सौदे को लेकर बेहद असमंजस में है,क्योंकि उसे डर है कि रूस की मदद करने पर उसके अपने ऊर्जा निर्यात पर गंभीर आंच आ सकती है।
यूक्रेन के हमलों से रूस में मचा हाहाकार
पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन के अत्याधुनिक ड्रोन हमलों ने रूस के कई बड़े तेल रिफाइनरियों को तबाह कर दिया है। इन हमलों ने सीधे रूस की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर चोट की है। यूक्रेन के हमलों से रूस में हाहाकार मचा हुआ है।
सैन्य और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है...
सैन्य और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों ने रूसी नागरिकों के बीच उस इन्फॉर्मेशन बबल को पूरी तरह तोड़ दिया है,जिसे सरकारी मीडिया ने युद्ध की जमीनी हकीकत छुपाने के लिए बनाया था।अब युद्ध का असर सीधे आम रूसियों के दैनिक जीवन और जेब पर दिखने लगा है।
कजाकिस्तान के लिए धर्मसंकट जैसे हालात
रूस की इस मांग ने कजाकिस्तान को बेहद मुश्किल हालत में खड़ा कर दिया है।कजाकिस्तान न तो खुलकर हां कह पा रहा है और न ही ना।कजाकिस्तान के कच्चे तेल के निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा रूसी पाइपलाइनों और बंदरगाहों (जैसे कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम) के जरिए वैश्विक बाजारों में जाता है। रूस पहले भी कजाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए इन रास्तों को रोकने की धमकी दे चुका है।अगर कजाकिस्तान ने रूस को पेट्रोल की सप्लाई की तो यूक्रेन कजाकिस्तान के उन बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है,जो रूसी क्षेत्र से गुजरते हैं। यूक्रेन की ड्रोन तकनीक ने इस युद्ध की दिशा बदल दी है।