अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर के मोहल्ला नई बस्ती में रहने वाले पाकिस्तान से आए जगदीश नवलानी को 47 साल बाद और कैलाश सचदेवा को 12 साल बाद भारत की नागरिकता मिली है।अभी तक ये दोनों वीजा पर रह रहे थे। नागरिकता मिलने के बाद दोनों परिवारों और नई बस्ती के पूरे सिंधी समाज में खुशी का माहौल है।अभी एक दर्जन अन्य ऐसे ही केसों में नागरिकता मिलने की प्रक्रिया चल रही है।
जगदीश नवलानी का रेलवे रोड पर बैग का कारोबार है।जगदीश कहते हैं कि सन 1978 में वह सिर्फ छह साल के थे। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जिला जैकोबाबाद में गांव कंडकौर में उनका पैतृक मकान था।उस समय वहां के हालात को देखते हुए उनके पिता इंद्रलाल नवलानी और मां पुतलीबाई उनको और उनके दो भाई और दो बहनों को लेकर अलीगढ़ नई बस्ती में आ गए थे। यहां पर 1947 में ही उनके चाचा और ताऊ के परिवार रह रहे थे। माता पिता के पासपोर्ट पर ही पूरा परिवार यहां आया था। उनके माता पिता बिना भारत की नागरिकता लिए ही दुनिया से चले गए। अब परिवार में 47 साल बाद उनको भारत की नागरिकता मिली है। दो भाई और दो बहनों को भी नागरिकता का इंतजार है। उनका प्रत्येक दो वर्ष बाद वीजा बढ़वाना पड़ता है।
कैलाश ने 2015 में किया था आवेदन
नई बस्ती के कैलाश सचदेवा के परिवार में भी खुशी का माहौल है। 12 साल पहले कैलाश भी पाकिस्तान से नई बस्ती अपने परिवार के साथ आ गए थे। यहां पर उनके रिश्तेदार पहले से ही रहते थे। कैलाश का खिरनी गेट पर कॉस्मेटिक के सामान का शोरूम है। कैलाश ने बताया कि वर्ष 2015 में आवेदन किया था,अब जाकर नागरिकता मिली है। उनके पिता रमेश लाल को भारत की नागरिकता मिल चुकी है। परिवार के अन्य सदस्यों की नागरिकता प्रक्रिया चल रही है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है पत्र
जगदीश और कैलाश को नागरिकता देने के संबंध में गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक आईएएस शीतल वर्मा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि नागरिकता नियम 2009 के नियम के तहत पात्र आवेदकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का कार्य किया जाता है। नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 के तहत राज्य स्तरीय सशक्त समिति द्वारा अलीगढ़, लखनऊ, पीलीभीत, अंबेडकर नगर, हाथरस और कानपुर के 35 पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी गई है।
नागरिकता के काम में तेजी लाने की अपील
अलीगढ़ सिंधी समाज के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजानी कहते हैं कि वह केंद्र और राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हैं कि नागरिकता के काम में तेजी आई। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत है,जिससे समाज के लोगों को और राहत मिल सके।