पाकिस्तान की कैसे बचेगी जान,आटा-तेल के बाद अब दवाओं के संकट से हाल-बेहाल
पाकिस्तान की कैसे बचेगी जान,आटा-तेल के बाद अब दवाओं के संकट से हाल-बेहाल

06 May 2026 |   22



 

नई दिल्ली।कंगाल पाकिस्तान का हाल बेहाल है।कर्ज का जाल पहले से पाकिस्तान इकोनॉमी को धराशाई कर रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध से पाकिस्तान में हाहाकार मचा है।होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट से पाकिस्तान की जनता पर महंगाई की मार पड़ रही है।आटा,तेल,गैस से लेकर रोजमर्रा के सामनों के लिए लोग परेशान हैं,इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है।वहीं अब हालात और भी खराब हो चुके हैं, पाकिस्तान में लोग इलाज के लिए तरस रहे हैं और दवाइयों का संकट बढ़ता जा रहा है।

दवाओं की कमी से जूझता पाकिस्तान

अमेरिका-ईरान युद्ध से पाकिस्तान में दवा संकट लगातार गहराता जा रहा है,कीमतों में लगातार बढ़ोतरी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है।लाहौर,कराची और पेशावर कई सरकारी अस्पताल दवाओं की भारी कमी का सामना कर रहे है।मरीजों को पर्याप्त इलाज तक मुहैया नहीं हो पा रहा है।
Pakistan Medicine Crisis कमजोर प्राइसिंग सिस्टम और अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट के चलते खड़ा हुआ है।हालात ये है कि इलाज कराने के लिए पाकिस्तान के कई शहरों में मरीज महंगी दवाओं के चलते गंभीर वित्तीय संकट में फंसते जा रहे हैं।एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से शिपिंग कॉस्ट में इजाफा हुआ है और पाकिस्तान के दवा क्षेत्र के लिए जरूरी आयातित कच्चे माल की कीमतें चरम पर पहुंच गई हैं।

पहले से जारी संकट और बढ़ा

वैसे तो पाकिस्तान में जरूरी चीजों और खासतौर पर दवाइयों का संकट लंबे समय से जारी है।एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट की मानें तो शहरी केंद्रों में दवाओं की कीमतें 2023 से लगातार बढ़ रही हैं।जरूरी दवाओं के दाम 2024 में करीब 50 फीसदी और 2025 में फिर से 30-40 फीसदी बढ़े। वहीं 2026 में अमेरिका-ईरान युद्ध ने इन्हें हाई पर पहुंचा दिया है। इस Price Hike के अलावा शहबाज शरीफ सरकार द्वारा दवा प्रोडक्शन के लिए जरूरी सामानों या कच्चे माल पर 18 फीसदी सामान्य सेल्स टैक्स लगाकर आम लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है।

पाकिस्तान केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल समद बुधानी का कहना है....

पाकिस्तान केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल समद बुधानी का कहना है कि जब सरकार जरूरी दवाओं की कीमतों पर निर्णय लेने में देरी करती है,तो आयातक आपूर्ति कम कर देते हैं,जिससे कमी हो जाती है।कराची के थोक विक्रेताओं ने दावा किया है कि फिलहाल हालात ये हैं कि हर 15 से 20 दिनों में दवा की कीमतें बदल रही हैं।BP-कोलेस्ट्रॉल की दवाओं के दाम दो साल पहले की तुलना में दोगुने हो चुके हैं।मेडिसिन प्राइस एक्सपर्ट नूर मेहर का कहना है कि दवाओं की कीमतों के रेग्युलेटरी ढील देने से निगरानी कमजोर हुई है,क्योंकि कंपनियां खुद ही इनकी कीमतें तय कर रही हैं,जिससे लोगों को कीमतों में बार-बार वृद्धि देखने को मिल रही है।

अमेरिका-ईरान ने युद्ध ने ऐसे निकाला पाकिस्तान का तेल 

अमेरिका-ईरान युद्ध ने पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है।इससे जहां एनर्जी प्राइस उछले हैं,तो महंगाई में भी तगड़ी बढ़ोतरी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा है।पाकिस्तान के आयात बिल में बढ़ोतरी ने संकट को और बढ़ाने का काम किया है। ग्लोबल बेंचमार्च कीमतों में तगड़े उछाल के बाद ये 167 फीसदी बढ़कर 300 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह से 800 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह हो गया है।प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अप्रैल 2026 में इस बढ़ोतरी की पुष्टि की थी, जिससे पाकिस्तान के ऊपर बड़े संकट की गंभीरता का पता चलता है।

Pakistan Economy पर इसका बुरा असर

Pakistan Economy पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। एनालिस्ट बढ़ती महंगाई,चालू खाता घाटा,विदेशी मुद्रा भंडार में कमी,करेंसी के कमजोर होने और कराची बंदरगाह पर बाधाओं से स्थिति और बिगड़ने की पीएम शहबाज शरीफ बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के बदहाल होने का सबसे बड़ा कारण आयातित ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता है, जिसका लगभग 85-90 फीसदी खाड़ी देशों से ही पूरा होता है।

बता दें कि तेल के खेल के असर को समझें तो अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी होती है तो पाकिस्तान में महंगाई 0.4-0.6 फीसदी तक बढ़ सकती है, जो कि साउथ एशिया में सबसे अधिक संवेदनशील दरों में से एक है। तेल-गैस संकट के चलते देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आटा,दाल,चावल समेत अन्य खाने पीने की चीजों पर महंगाई पहले से बढ़ चुकी है, ऊपर से अब दवाओं की कमी और बढ़ते दाम ने लोगों की परेशानी को और भी बढ़ाने का काम किया है।

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