विवेक बिहार अग्निकांड:इस इमारत ने बहुत दर्द दिया,अब यहां नहीं रहेंगे,अग्निकांड के बाद दहशत में लोग घर खाली करने को मजबूर
विवेक बिहार अग्निकांड:इस इमारत ने बहुत दर्द दिया,अब यहां नहीं रहेंगे,अग्निकांड के बाद दहशत में लोग घर खाली करने को मजबूर

04 May 2026 |   24



 

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड से एक ही रात खुशियों से भरे घर राख में बदल ग‌ए।चीख-पुकार,आग की लपटों और बेबसी के उस मंजर ने कई जिंदगियां छीन ली और पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।आज भी हवा में जलने की गंध और अपनों को खोने का दर्द साफ महसूस किया जा सकता है।

भीषण अग्निकांड में मरने वाले तीनों परिवारों का अंतिम संस्कार होने के बाद सोमवार सुबह मृतकों की याद में शोक सभा आयोजित की गई।शोक सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।मृतकों के गम में डूबे बिल्डिंग के रहने वाले कुछ लोगों ने सीधे कहा कि इस इमारत ने बहुत दर्द दिया है,अब यहां नहीं रहना।

भीषण अग्निकांड के बाद इमारत में रहने वाले अधिकांश लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं।कई लोग अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।कुछ ने पास के होटलों में अस्थायी ठिकाना बना लिया है,जो फ्लैट पूरी तरह आग की चपेट में नहीं आए, वहां रहने वाले लोगों ने अपना सामान निकाल लिया और अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए।

आगे के हिस्से में चौथी मंजिल पर बने फ्लैट में रहने वाले डाॅक्टर सुधीर मित्तल ने कहा कि जो घटना कल हुई,वैसा मंजर कभी नहीं देख,जिस इमारत ने नौ अपनों को खा लिया, अब वहां नहीं रहेंगे।नहीं पता कहां स्थाई घर होगा,लेकिन यहां नहीं रहना।सुधीर मित्तल ने कहा कि पिछले हिस्से की सुरक्षा के लिए बिल्डर ने ही ग्रिल लगाकर दीं थीं। वहां लोगों ने गार्डन बना रखा था। 2016 में फ्लैट खरीदा था और 2017 में बिल्डिंग का काम पूरा हुआ और बाकी लोग रहने आए थे।

अरविंद जैन की बहू सोनाली जैन ने दमकल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। सोनाली का आरोप है कि दमकल की गाड़ियां एक-एक कर मौके पर पहुंचीं, जिससे आग बुझाने में देरी हुई। यदि एकसाथ पर्याप्त संसाधन पहुंचते, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। सोनाली ने कहा कि उनके फ्लैट में डिजिटल लाक नहीं था, सामान्य लाक था लेकिन फंस गया था।

डाॅक्टर सुधीर मित्तल ने बताया कि उन्हें,उनकी पत्नी, बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को उतारने में 40-45 मिनट का समय लग लग गया। उन्हें सीढ़ियों और ट्राली क्रेन से नीचे उतारा गया। आग लगते ही वह दरवाजे की ओर भागे, जैसे ही दरवाजा खोला, वह जलता हुआ टूटकर नीचे गिर गया। सीढ़ियों से आग की लपटें उठ रही थीं। इसके बाद बेडरूम से बालकनी की ओर भागे और दरवाजे बंद कर दिए,जिससे आग की लपटें उनकी ओर न बढ़ें।

भीषण अग्निकांड के कारणों का पता लगाने के लिए फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। बिजली आपूर्ति करने वाली बीएसईएस की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और एहतियातन पूरी इमारत की बिजली काट दी गई। आग में कारों की चाबी तक जल गई, ऐसे में लोग अपनी कारें भी नहीं निकाल पा रहे हैं। 

पहली मंजिल पर रहने वाले कमल कुमार गोयल ने बताया कि भले ही अपने रिश्तेदारों के घर सोए हों लेकिन रातभर नींद नहीं आई।रातभर आग का मंजर आंखों के सामने आता रहा। कमल ने बताया कि दमकल की पहली गाड़ी का पानी पांच मिनट में ही खत्म हो गया,दूसरी गाड़ी का पाइप फट गया, कटर भी नहीं था।पड़ोसियों ने कटर मंगवाया,लेकिन उसमें भी लगभग आधा घंटा लगा।कमल ने दमकल विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया।

सिविल इंजीनियर दीपक वर्मा ने बताया कि आग लगने से इमारत की दीवारें,बीम आदि सभी को अंदरूनी हिस्सों में भी नुकसान होता है। ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले पूरी इमारत की सुरक्षा जांच बेहद जरूरी है। जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है, तब तक यहां दोबारा रहना खतरे से खाली नहीं होगा।

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