बदायूं।उत्तर प्रदेश का बदायूं जिला प्राचीन काल में वेदों की शिक्षा और संस्कृति का एक बड़ा केंद्र माना जाता था।आज आधुनिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की एक नई कहानी लिख रहा है। बदायूं का प्राचीन नाम वेदा मऊ था,लेकिन समय के साथ बदलकर बदायूं हो गया।कभी केवल सूफी संतों, साहित्यकारों और धार्मिक पर्यटन के लिए जाना जाने वाला बदायूं जिला अब गंगा एक्सप्रेसवे और महिला सशक्तिकरण की बड़ी परियोजनाओं के जरिए बढ़ते उत्तर प्रदेश की तस्वीर में एक नया रंग भर रहा है।
कछला घाट,आस्था की पावन धारा
बदायूं की पहचान गंगा नदी के किनारे बसे कछला घाट से भी है।यह स्थान भागीरथ की तपस्या और गंगा के अवतरण से जुड़ा हुआ है।मान्यता है कि यहीं महर्षि कश्यप ने भी तपस्या की थी।आज भी इस घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा-पाठ के लिए आते हैं। प्रशासन इस घाट को अब एक नए स्वरूप में विकसित कर रहा है।यहां गंगा आरती के आयोजन के साथ-साथ पर्यटकों के लिए पार्क,रिवरफ्रंट और अन्य सुविधाएं बनाई जा रही हैं,ताकि इसे एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया जा सके।
बायोडायवर्सिटी पार्क,डॉल्फिन और प्रवासी पक्षियों का नया ठिकाना
कछला घाट के पास ही गंगा किनारे 50 हेक्टेयर जमीन पर लगभग 6 करोड़ 64 लाख रुपए की लागत से एक बड़ा बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित किया जा रहा है।यह पार्क न केवल पर्यावरण संरक्षण का एक अहम कदम है, बल्कि यह इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देगा।इस क्षेत्र में पहले से ही गंगा डॉल्फिन की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है।सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षी भी आते हैं।इस पार्क के बनने से दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण होगा और लोगों को प्रकृति के करीब जाने का मौका मिलेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे बदायूं के विकास की नई लाइफलाइन
बदायूं के विकास में सबसे बड़ा गेम चेंजर गंगा एक्सप्रेसवे साबित हो रहा है।देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे में से एक गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट बदायूं को सीधे दिल्ली,नोएडा,मेरठ, लखनऊ और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ रहा है।एक्सप्रेसवे के चालू होने से अब दिल्ली या लखनऊ का सफर जो पहले 5-6 घंटे का होता था,वह अब महज 2-3 घंटे में पूरा हो सकेगा।कनेक्टिविटी बेहतर होने से यहां नए उद्योगों के लिए रास्ते खुलेंगे,जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।इसके साथ ही यहां एक नया रेलवे स्टेशन और दूसरे हवाई अड्डे के निर्माण की भी योजना है,जो इस क्षेत्र में निवेश को और आकर्षित करेगा।
महिला पीएसी बटालियन,सशक्तिकरण की नई दिशा
बदायूं अब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है,यह महिला सशक्तिकरण का भी एक बड़ा केंद्र बन रहा है।योगी सरकार द्वारा यहां प्रदेश की पहली महिला पीएसी बटालियन स्थापित की जा रही है।लगभग 412 करोड़ रूपए की लागत से बन रहे इस केंद्र में महिलाओं को पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।इस परिसर में एक पुलिस चौकी भी होगी।
यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार और सम्मान के नए अवसर भी खोलेगा।
बता दें कि बदायूं आज अपनी प्राचीन वेदों की नगरी वाली पहचान को खोए बिना,विकास के एक आधुनिक और तेज रास्ते पर चल पड़ा है।गंगा एक्सप्रेसवे की रफ्तार और महिला सशक्तिकरण की गूंज यह बताती है कि यह शहर अब नए उत्तर प्रदेश के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ रहा है।