अमेरिका-ईरान जंग से कैसे बदल रहा भारत के एलपीजी इंपोर्ट का मैप,अमेरिका बना बड़ा सप्लायर,क्या अब कम होगा दबाव
अमेरिका-ईरान जंग से कैसे बदल रहा भारत के एलपीजी इंपोर्ट का मैप,अमेरिका बना बड़ा सप्लायर,क्या अब कम होगा दबाव

24 Sep 2026 |   25



 

नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग से विश्व का एनर्जी मार्केट उबल गया।सप्लाई में आई बाधा से कीमतें खौल उठीं और खाड़ी के तेल पर निर्भर देशों में एनर्जी का संकट पैदा हो गया।युद्ध से सप्लाई में रुकावटों से पर्शियन गल्फ से सप्लाई पर अधिक निर्भरता का जोखिम भारत के सामने आ गया।इसके बाद भारत ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव की तरफ कदम बढ़ा दिए।अब देश तेजी से अपने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) इंपोर्ट के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन ला रहा है।

इंपोर्ट में 20 फीसदी हिस्सेदारी

अमेरिका का पिछले साल भारत के एलपीजी इंपोर्ट में सिर्फ 6 फीसदी हिस्सा था, अब अमेरिका देश का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है और उसका हिस्सा 20 फीसदी से अधिक हो गया है।यह बदलाव भारत के एलपीजी व्यापार के तरीके में एक बड़ा बदलाव है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है और पारंपरिक रूप से अपनी खाना पकाने की गैस का एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी से मंगाता रहा है,लेकिन अमेरिका और ईरान जंग और उसके कारण क्षेत्रीय व्यापार में आई रुकावटों ने भारतीय रिफाइनरियों को अमेरिका और अफ्रीका से वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश करने के लिए प्रेरित किया है।

भारतीय एलपीजी बाजार में अमेरिका की पकड़ मजबूत

पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयासों के तहत भारत ने पिछले साल अमेरिका के साथ अपना पहला एलपीजी आपूर्ति समझौता किया था।आपूर्ति में हालिया रुकावटें अब इस डायवर्सिफिकेशन लाने की प्रक्रिया को तेज कर रही हैं।सरकारी भारतीय रिफाइनरियां इस महीने अमेरिका से आपूर्ति के लिए टेंडर जारी कर सकती हैं, जो अगले साल भारत के एलपीजी आयात का 20 फीसदी तक हो सकता है।इस तरह की खरीद से भारत के एलपीजी बाजार में अमेरिका की भूमिका और मजबूत होगी और फारस की खाड़ी से आने वाली आपूर्ति का एक विकल्प मिलेगा।यह बदलाव ऐसे समय में आया है,जब भारतीय रिफाइनरियों ने घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया है।उत्पादन बढ़कर लगभग 44,000 टन प्रतिदिन हो गया है,जो अगस्त के औसत से लगभग 20 फीसदी अधिक है, क्योंकि त्योहारी सीजन में घरेलू मांग बढ़ी है और सप्लाई का जोखिम बना हुआ है।

खाड़ी में रुकावटें बनी हुई हैं चिंता का विषय

फारस की खाड़ी भारत के एलपीजी का एक महत्वपूर्ण सोर्स बनी हुई है,लेकिन हालिया रुकावटों ने इस क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भरता के जोखिम को उजागर किया है।भारत पेट्रोलियम कॉर्प के लिए सितंबर का एक कार्गो और इंडियन ऑयल कॉर्प के लिए दो कार्गो,जो सभी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से आने थे,नहीं लिए जा सके। ADNOC ने संकेत दिया है कि वह अक्टूबर के लिए अपनी तय मात्रा की सप्लाई करेगा,जिसमें इंडियन ऑयल के लिए पांच कार्गो और भारत पेट्रोलियम तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए तीन-तीन कार्गो शामिल हैं।कंपनी ने कहा कि वह अपने भारतीय ग्राहकों को विश्वसनीय और सुरक्षित एलपीजी आपूर्ति देना जारी रखे हुए है।

अलग-अलग सोर्स से सप्लाई की जरूरत बढ़ी

सप्लाई में रुकावटें ऐसे समय में आई हैं जब भारत में त्योहारों सीजन की शुरुआत हो रही है,जिसमें खपत की डिमांड काफी अधिक हो जाती है।सर्दियों में मांग बढ़ने से सप्लाई पर और दबाव पड़ सकता है।हालांकि गर्मियों में सप्लाई की फौरी कमी को दूर करने में अमेरिका और अफ्रीका से आए वैकल्पिक कार्गो ने मदद की थी, लेकिन हाल की घटनाओं से पता चलता है कि अलग-अलग स्रोतों से सप्लाई लेना भारत की एलपीजी खरीद रणनीति का एक स्थायी हिस्सा बन सकता है।

क्या कम हो सकेगी निर्भरता

इसलिए भारत के लिए यह बदलाव सिर्फ सप्लाई में रुकावट वाले कार्गो को बदलने तक सीमित नहीं है।अमेरिका की बड़ी भूमिका देश के एलपीजी आयात के मिश्रण को बदल सकती है।साथ ही उस क्षेत्र पर निर्भरता कम कर सकती है,जो ऐतिहासिक रूप से खाना पकाने के ईंधन की सप्लाई चेन के लिए अहम रहा है।

More news