नई दिल्ली।त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि रोकने के लिए सरकार ने कच्चे और रिफाइंड खाने के तेल पर आयात शुल्क कम कर दिया है।पिछले एक साल में घरेलू वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि हुई है।यह कदम सितंबर से नवंबर तक चलने वाले बड़े त्योहारी सीजन से पहले उठाया गया है,जब मिठाइयों,स्नैक्स और तली-भुनी चीज़ों की मांग से आमतौर पर खाने के तेल की खपत बढ़ती है।आयात लागत कम होने से घरेलू कीमतें कम हो सकती हैं और त्योहारी सीजन के दौरान ग्राहकों के लिए इसे खरीदना आसान हो सकता है।
कच्चे खाद्य तेलों को बड़ी राहत
सरकार ने कच्चे पाम ऑयल और कच्चे सोया ऑयल पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है।एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस और सोशल वेलफेयर सरचार्ज को जोड़ने के बाद दोनों कच्चे तेलों पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी 16.5 फीसदी से घटकर 11 फीसदी हो जाएगी। इस कटौती से रिफाइनर्स के लिए लैंडेड कॉस्ट (तेल को देश में लाने और प्रोसेस करने की कुल लागत) कम होने और घरेलू खाने के तेल बाजार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
रिफाइंड तेलों को भी मिली राहत
सूरजमुखी तेल पर सबसे ज़्यादा ड्यूटी कटौती की गई है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दी गई है, जबकि रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटकर 22.5 फीसदी हो गई है। लागू होने वाले अतिरिक्त लेवी (टैक्स) को मिलाकर कच्चे सूरजमुखी तेल पर कुल 5.5 फीसदी ड्यूटी लगेगी,जबकि पहले यह 16.5 फीसदी थी। इससे पहले जून 2025 में भी सरकार ने प्रमुख कच्चे खाद्य तेलों (सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम) पर आयात शुल्क 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया था।
कीमतों में उछाल का मुख्य कारण
भारत अपनी सालाना खाद्य तेल की कुल जरूरत का 58 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात करता है। देश में हर साल करीब 16 मिलियन टन तेल का आयात होता है,इसमें मुख्य रूप से पाम,सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल हैं। इसलिए घरेलू बाजार के लिए वैश्विक कीमतें और आयात नीतियां महत्वपूर्ण हैं।वैश्विक स्तर पर मालभाड़ा (फ्रेट) और बीमा लागत में वृद्धि, रुपये के मूल्य में गिरावट और इंडोनेशिया जैसे निर्यातक देशों द्वारा खाद्य तेलों का इस्तेमाल बायोफ्यूल (जैव ईंधन) के लिए किए जाने की वजह से दुनियाभर में तेल की कीमतों पर असर पड़ा है।
खुदरा बाजार में पिछले साल से अधिक हैं दाम
घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की खुदरा कीमतें पहले से ही पिछले साल के स्तर को पार कर चुकी हैं।उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी सेल के अनुसार बुधवार को सरसों, सोयाबीन और पाम तेल की औसत खुदरा कीमत क्रमशः 202.87 रुपये, 166.87 रुपये और 153.89 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। पिछले साल की तुलना में इन तीनों तेलों की कीमतें क्रमशः 8 प्रतिशत, 14 प्रतिशत और 16 प्रतिशत अधिक महंगी हैं।
त्योहारी सीजन में बदलेगा खपत का पैटर्न
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी में बड़ी कटौती से रिफाइनरों के बीच इसकी कीमत में प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर हो सकती है और अधिक आयात को बढ़ावा मिल सकता है। इससे पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की कुछ मांग सूरजमुखी तेल की ओर मुड़ सकती है,जिससे आने वाले त्योहारी सीज़न के दौरान घरेलू खपत के पैटर्न पर असर पड़ सकता है।आयात शुल्क कम होने से खाद्य तेल की लागत कम होने,त्योहारी सीजन में खपत को बढ़ावा मिलने और भारत के आयात-निर्भर वनस्पति तेल बाज़ार में सूरजमुखी तेल की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है। पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से आयात किए जाने वाले खाद्य तेल हैं, जिनकी आपूर्ति मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होती है।