$125 के पार पहुंचा कच्चा तेल,ट्रंप के 100% टैरिफ से एनर्जी सप्लाई पर मंडराया संकट
$125 के पार पहुंचा कच्चा तेल,ट्रंप के 100% टैरिफ से एनर्जी सप्लाई पर मंडराया संकट

19 Sep 2026 |   21



 

नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी है।ये आग अब भारत के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रही है।पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल ने अपनी नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। 17 सितंबर को कच्चे तेल की इंडियन बास्केट की कीमत उछलकर $125.14 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है,इस उछाल के साथ सितंबर महीने के शुरुआती 17 दिनों में इंडियन बास्केट का औसत दाम $113.91 प्रति बैरल दर्ज हुआ है,जो अगस्त महीने में महज $90.19 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था।

एनर्जी सप्लाई पर फिर गहराया संकट

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल-गैस की सप्लाई में आ रही रुकावटों से हालात बिगड़ गए हैं। इस बीच अमेरिकी संसद में पारित लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 ने बाजार का माहौल और गरमा दिया है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नए कानून पर दस्तखत कर दिए हैं,जिससे उन्हें रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।इस फैसले के बाद भारत समेत विश्व भर में एनर्जी प्रोडक्ट्स की स्थिर सप्लाई को लेकर डर फिर बढ़ गया है।

महंगाई का नया झटका,सीएनजी-एलपीजी के बाद अब आयात खर्च की मार

भारतीय तेल और गैस कंपनियों ने पिछले महीने ही सीएनजी, कमर्शियल एलपीजी और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी की थी।अब इंडियन बास्केट के $125 पार जाने से कच्चे तेल और गैस के आयात पर देश का खर्च फिर बहुत तेजी से बढ़ने लगा है।

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन का बड़ा बयान

अमेरिकी संसद में पेश बिल को लेकर नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक लाहिड़ी ने टैरिफ नीति पर सवाल उठाए हैं।
अशोक लाहिड़ी ने कहा कि टैरिफ के मोर्चे पर अनिश्चितता बनी हुई है,अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जो टैरिफ लगा रहे हैं, Who is paying for it? It is the US Consumers. अमेरिका में इंपोर्ट करने वाले इंपोर्टर्स ने रेसिप्रोकल टैरिफ का पूरा फायदा वहां के उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया है।ऐसे में सवाल उठता है कि राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति किसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है अमेरिकी अर्थव्यवस्था को या एक्सपोर्टर्स को।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द फाइनल करना बहुत जरूरी होगा।अशोक लाहिड़ी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की इस अनिश्चितता से निपटने के लिए हमें समस्या का सीधा समाधान खोजना होगा। भारत सरकार से अनुरोध है कि हमें सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना होगा,लेकिन उम्मीद के साथ आगे बढ़ना होगा।

पीयूष गोयल का अमेरिका दौरा और फ्री ट्रेड पर बड़ा रुख

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस महीने के अंत में G20 बैठक के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। इस दौरे पर अमेरिकी समकक्षी अधिकारियों के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें होंगी, जिसमें प्रस्तावित Bilateral Trade Agreement सहित दोनों देशों के व्यापारिक मुद्दों पर सीधी बात होगी।इससे पहले 3 सितंबर को एक वर्कशॉप में पीयूष गोयल ने भारत का रुख साफ करते हुए कहा था कि जैसे ही अमेरिका हमें खास फायदा देगा, हम BTA को अंतिम रूप देंगे और व्यापार समझौते का ऐलान करेंगे।जब वॉशिंगटन भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टैरिफ में खास फायदा देगा, तभी भारत इस डील को पूरा करेगा। भारत की टैरिफ दरें प्रतिस्पर्धियों को मिलने वाली दरों से बेहतर या शून्य होनी चाहिए।

संसदीय समिति की सिफारिश,पूरा करें मिशन 500

पिछले महीने वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के मूल्यांकन में सरकार को अहम सुझाव दिए थे।समिति ने कहा कि देशहित को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए भारत-अमेरिका बीटीए को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।संसदीय समिति ने रिपोर्ट में कहा कि विभाग को मिशन 500 पहल के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक समयबद्ध रोडमैप तैयार करना चाहिए,इसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश को प्रोत्साहित करना,ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत अहम तकनीकों में सहयोग मजबूत करना,सप्लाई चेन को अधिक लचीला बनाना और भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली टैरिफ व नॉन-टैरिफ रुकावटों को दूर करना शामिल होना चाहिए।

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