नई दिल्ली।पेट्रोल पंप पर अगर आप तेल भरवाने जा रहे हैं तो अपनी जेब में कैश रखना होगा,क्योंकि पेट्रोल पंप डीलरों ने अब यूपीआई से नहीं कैश पेमेंट लेने की चेतावनी दे दी है। दरअसल देशभर के पेट्रोल पंप डीलरों ने 2000 रुपए या उससे अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 5 रुपए के मर्चेंट डिस्काउंट रेट का विरोध किया है।डीलरों ने धमकी दी है कि अगर उन्हें हर ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए का फिक्स्ड मर्चेंट डिस्काउंट रेट देना पड़ा तो वे 2000 रुपए और उससे ज्यादा के यूपीआई पेमेंट लेना बंद कर देंगे और कैश पेमेंट लेने लगेंगे।
डीलरों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल बेचने पर उनका मार्जिन पहले ही काफी कम है और ऐसे में हर बड़े यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क देना उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ाएगा।
जानें क्या है तर्क
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स के प्रवक्ता मोंटी सहगल का कहना है कि अगर फ्यूल रिटेलर्स को छूट नहीं दी गई तो हमें 2,000 रुपए और उससे ज्यादा के यूपीआई पेमेंट लेना बंद करना होगा।इसके अलावा कर्नाटक के पेट्रोलियम डीलरों के संगठन ने सरकार और सरकारी तेल कंपनियों को पत्र लिखकर पेट्रोल पंपों को एमडीआर से पूरी तरह छूट देने की मांग की है।डीलरों का तर्क है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेल कंपनियां तय करती हैं और डीलर अपने स्तर पर कीमत बढ़ाकर डिजिटल पेमेंट का खर्च ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। वहीं दिल्ली-एनसीआर पंजाब,उत्तर प्रदेश,मुंबई और राजस्थान के डीलरों का कहना है कि किसी भी तरह का एमडीआर उनके बहुत कम मार्जिन (लगभग ₹2.40-3.40 प्रति लीटर) पर एक अतिरिक्त बोझ है। यह मार्जिन सरकार अपनी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के जरिए तय करती है।
जानें एनपीसीआई ने क्या कहा
मंगलवार को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने अक्सर पूछे जाने वाले सवाल में पेट्रोल पंप पर एमडीआर चार्ज को लेकर विस्तार से जानकारी दी है।एनपीसीआई ने बताया कि 2000 रुपए तक के यूपीआई से किए गए ईंधन भुगतान पर एमडीआर शून्य रहेगा। वहीं 2,000 रुपए से अधिक के पेट्रोल पंप भुगतान पर 5 रुपए का फ्लैट कंसेशनल चार्ज लागू होगा।
एनपीसीआई का कहना है कि फ्लैट 5 रुपए शुल्क का उद्देश्य बड़े ईंधन लेनदेन पर लगने वाले ज्यादा प्रोसेसिंग शुल्क से पेट्रोल पंप ऑपरेटरों को बचाना है।हालांकि पेट्रोलियम डीलरों के संगठनों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपए से ज्यादा का भुगतान आम बात है,इसलिए यह शुल्क उनके लिए लगातार बढ़ता हुआ खर्च बन सकता है।
बता दें कि अप्रैल 2026 तक देश भर में 1,03,023 पेट्रोल पंप हैं।इनमें से 90 फीसदी से अधिक पंप तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन,भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा चलाए जाते हैं।इसके अलावा नायरा,जियो-बीपी और शेल जैसी प्राइवेट कंपनियां भी पेट्रोल पंप चला रही हैं।