नई दिल्ली।नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने भोटेकोशी-त्रिशूली घाटी में भारी तबाही मचाई। 9 सितंबर तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इसमें 1300 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई। 5000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए गए हैं। बाढ़ में घरों के साथ सड़कें,पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी बुरी तरह प्रभावित हुए।
नेपाल की तबाही ने हिमालय के बढ़ते खतरे की ओर फिर खींचा ध्यान
नेपाल की तबाही ने हिमालय के बढ़ते खतरे की ओर फिर ध्यान खींचा है। 200 से अधिक ग्लेशियल झीलें हाई रिस्क पर हैं और बाढ़ की लहर मिनटों में नीचे पहुंच सकती है,ऐसे में समय पर अलर्ट ही बड़ा बचाव बन सकता है।यह बाढ़ ल्हेंदे खोला नदी में आई तेज लहर के बाद आई,जो भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है।ऊंचाई वाले इलाके में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया,इससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया,इसके बाद पानी और मलबा अचानक तेजी से नीचे आया और लोगों को संभलने का मौका नहीं मिल पाया।
5 से 30 मिनट में पहुंच सकता है बाढ़ का पानी
वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियर और बर्फ टूटने से अचानक बाढ़ आ सकती है।कई बार बर्फ,चट्टान और मलबा नदी का रास्ता रोक देते हैं,इसके बाद जब यह रास्ता टूटता है, तो पानी बहुत तेजी से नीचे आता है।ऐसी बाढ़ की लहर कई जगहों पर सिर्फ 5 से 30 मिनट में नीचे रहने वाली बस्तियों तक पहुंच सकती है।लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए बहुत कम समय मिलता है।पहले से अलर्ट मिलना बेहद जरूरी है।
200 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें हाई रिस्क पर
हिंदू-कुश हिमालय विश्व के बड़े बर्फीले इलाकों में शामिल है। यहां से निकलने वाली नदियां एशिया के 10 बड़े नदियों को पानी देती हैं,लेकिन बढ़ते तापमान से ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं,ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ भी तेजी से पिघल रही है।इससे नई ग्लेशियल झीलें बन रही हैं और कुछ जगहों पर बर्फ और चट्टानों की स्थिति भी कमजोर हो रही है।हिमालय में 200 से ज्यादा ग्लेशियल झीलों को बहुत ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।छोटी झीलों से भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
पिछले साल भी आई थी बड़ी बाढ़
भोटेकोशी नदी में 8 जुलाई 2025 को भी बड़ी बाढ़ आई थी। उस समय ऊपरी इलाके में एक ग्लेशियल झील का करीब 0.31 वर्ग किलोमीटर हिस्सा तेजी से कम हुआ था।बाढ़ में नेपाल-चीन फ्रेंडशिप ब्रिज बह गया था,सड़कें,गाड़ियां और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए थे।इस घटना में कम से कम 9 लोगों की मौत हुई और 19 लोग लापता हुए थे।
सेंसर और सैटेलाइट से मिल सकता है अलर्ट
नेपाल,भूटान,पाकिस्तान और चीन के कुछ हिस्सों में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों पर नजर रखने के लिए सेंसर,कैमरे और सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है,लेकिन अभी इनकी पहुंच काफी कम है। 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में सेंसर लगाना और उनकी देखभाल करना आसान नहीं है।इसके अलावा नेपाल में कई नदियों का ऊपरी हिस्सा सीमा पार है।इसलिए नेपाल और चीन के बीच समय पर डेटा शेयर करना भी जरूरी है।अगर ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों पर लगातार नजर रखी जाए और खतरा दिखते ही नीचे रहने वाले लोगों को अलर्ट भेजा जाए,तो ऐसी बाढ़ में जान-माल के नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।