नई दिल्ली।रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत और चीन में होड़ मच गई है।भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना 21 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा,ये भारत का कुल तेल आयात का 45 फीसदी था,लेकिन यह जुलाई के मुकाबले कम है।इस दौरान चीन ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है।अगस्त में चीन ने रूस से कच्चे तेल की रोजाना खरीद दो लाख बैरल बढ़ाकर 16 लाख बैरल कर दी है।ये मार्च के बाद सबसे ज्यादा है, लेकिन यह फरवरी के रोजाना 20 लाख बैरल से कम है।
मैरीटाइम इंटेलिजेंस और रिसर्च फर्म Kpler के डेटा के मुताबिक...
मैरीटाइम इंटेलिजेंस और रिसर्च फर्म Kpler के डेटा के मुताबिक अगस्त में रूस भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश बना रहा,जबकि एलपीजी और एलएनजी की सबसे ज्यादा सप्लाई अमेरिका से हुई।भारत ने पिछले महीने रूस से हर दिन 21 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा,लेकिन यह आंकड़ा जुलाई के 28 लाख बैरल से कम था।अन्य प्रमुख सप्लायर्स में यूएई (5 लाख बैरल), सऊदी अरब (5 लाख बैरल) और वेनेजुएला (3 लाख बैरल) शामिल हैं।
क्यों घटी सप्लाई
मई,जून और जुलाई की तुलना में अगस्त में भारत की कुल सप्लाई कम रही।ईरान युद्ध से भारतीय रिफाइनरियों ने सप्लाई की कमी से बचने के लिए खरीदारी बढ़ाई थी।अगस्त में कच्चे तेल की सप्लाई का अनुमान 46 लाख बैरल रहा,जो जुलाई के रोजाना आयात 50 लाख बैरल से लगभग 8 फीसदी कम है। जानकारों का कहना है कि यह गिरावट हाल के महीनों में भारी खरीदारी के बाद नरमी,कुछ रिफाइनरियों में तय मेंटेनेंस और रूसी कच्चे तेल की कम उपलब्धता को दिखाती है।भारत इस दौरान रूस को पेट्रोल और डीजल सप्लाई करने वाला एक अहम देश भी बनकर उभरा।यूक्रेन के हमलों से रूस की रिफाइनरीज पर असर पड़ा था।एनर्जी एनालिटिक्स फर्म Vortexa के मुताबिक अगस्त में रूस का समुद्र के रास्ते से पेट्रोल का आयात बढ़कर 125,000 बैरल प्रति दिन हो गया। रूस ने भारत के अलावा तुर्की और मोरक्को जैसे देशों से पेट्रोल और डीजल मंगाया।
यूएस से गैस
इस बीच अमेरिका भारत को एलपीजी और एलएनजी का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है।अगस्त में भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी एलपीजी के मामले में लगभग 51 फीसदी और एलएनजी के मामले में 38 फीसदी रही।कुल आयातित 1.1 मिलियन टन एलपीजी में से लगभग 0.6 मिलियन टन कुकिंग और हीटिंग गैस अमेरिका से आई, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 0.9 मिलियन टन था। इस दौरान यूएई (एक लाख टन) और अल्जीरिया (1 लाख टन) अन्य प्रमुख सप्लायर थे।भारत ने उस महीने में कुल 2.2 मिलियन टन एलएनजी इंपोर्ट की,जिसमें से 8 लाख टन अमेरिका से आई थी।इसके बाद ओमान (5 लाख टन) और नाइजीरिया (4 लाख टन) का नंबर है।जानकारों का कहना है कि एनर्जी इंपोर्ट में विविधता लाने की वजह से कमोडिटी की लागत बढ़ गई है,क्योंकि लंबी यात्राओं के कारण फ्रेट बिल और इंश्योरेंस चार्ज बढ़ गए हैं। कच्चा तेल आज मामूली गिरावट के साथ 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।