नई दिल्ली।भारत पर रूस से ट्रेड को कम करने के अमेरिका के लगातार जारी दबाव के बीच भारत और रूस ने एक कदम आगे जाते हुए आपसी ट्रेड में डॉलर पर निर्भरता काफी घटाई है।रूस और भारत के बीच कारोबार में लोकल करेंसी से पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।रूस के एक सीनियर बैंकर के मुताबिक दोनों देशों ने रुपये और रूबल में भुगतान के लिए ऐसा पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है,जिसके जरिए अब दोनों देशों के बीच होने वाले लगभग 96 फीसदी ट्रेड का सेटलमेंट लोकल करेंसी में हो रहा है।
22 रूसी और 17 भारतीय बैंक मिलकर कर रहे काम
भारत में Sberbank के प्रमुख इवान नोसोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच पेमेंट सेटलमेंट में अब कोई बड़ी दिक्कत नहीं है।यह रूस के दूसरे देशों के साथ पेमेंट के लिए सबसे भरोसेमंद और अच्छी तरह स्थापित मैकेनिज्म में से एक बन गया है।इवान नोसोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच इस ट्रेडिंग मैकेनिज्म को सपोर्ट करने के लिए फिलहाल 22 रूसी बैंक और 17 भारतीय बैंक काम कर रहे हैं।इनमें रूस का सबसे बड़ा बैंक Sberbank भी शामिल है,जिसे दोनों देशों के बीच पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इवान नोसोव ने कहा कि 90 फीसदी ट्रांजैक्शन 10 मिनट के भीतर प्रोसेस हो जाते हैं,जबकि आधे से ज्यादा ट्रांजैक्शन एक मिनट से भी कम समय में पूरे हो जाते हैं।
पहले ट्रेड सेटलमेंट में थी कई चुनौतियां
रूस और भारत के बीच लोकल करेंसी में ट्रेड सेटलमेंट की कोशिश पहले भी हुई है,लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां थीं।रूसी कंपनियों ने पहले भारत से होने वाले कारोबार में रुपये के ओवरहैंग की शिकायत की थी,इसकी एक वजह यह थी कि भारतीय रुपया पूरी तरह कन्वर्टिबल करेंसी नहीं है।इसके अलावा दोनों देशों के बीच ट्रेड बैलेंस भी एक बड़ी समस्या रहा है।भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है,जबकि रूस को भारत का निर्यात इसकी तुलना में काफी कम रहा है,इससे रूस के पास जमा होने वाले रुपये को इस्तेमाल करने के विकल्प सीमित हो जाते थे।अब पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से इस समस्या को कम करने की कोशिश हुई है।
रूस-भारत ट्रेड के आंकड़े
रूस और भारत के बीच ट्रेड में 2022 के बाद तेज उछाल आया,इसका बड़ा कारण भारत की तरफ से रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ना रही। 2024 में दोनों देशों का ट्रेड लगभग 70 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। 2025 में पश्चिमी प्रतिबंधों के और कड़े होने के बाद ट्रेड में गिरावट आई, लेकिन 2026 की पहली छमाही में इसमें फिर रिकवरी देखने को मिली।
भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक...
भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और रूस के बीच कुल द्विपक्षीय ट्रेड 68.7 अरब डॉलर रहा,इसमें भारत का रूस को निर्यात 4.9 अरब डॉलर और रूस से भारत का आयात 63.8 अरब डॉलर था।इसके बाद वित्त वर्ष 2025-26 में कुल द्विपक्षीय ट्रेड 59.863 अरब डॉलर रहा।आधिकारिक भारतीय मिशन के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान भारत का रूस को निर्यात लगभग 4.88 अरब डॉलर,जबकि रूस से आयात 55.369 अरब डॉलर रहा।भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय ट्रेड को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में लोकल करेंसी में पेमेंट सिस्टम को मजबूत करना दोनों देशों के बीच ट्रेड बढ़ाने की कोशिशों का अहम हिस्सा है।हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान भी दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को लेकर चर्चा हुई थी।