नई दिल्ली।कोरोना महामारी ने कई बच्चों को उनके माता-पिता को छीन लिया,जिससे उनका भविष्य संकट में पड़ गया।ऐसे बच्चों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना शुरू की है।इस योजना का मकसद इन बच्चों को सहारा देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।इसके तहत केंद्र सरकार बच्चों की पढ़ाई और सेहत का पूरा ध्यान रखती है।जब तक बच्चा 23 साल का नहीं हो जाता,तब तक सरकार उसे हर महीने आर्थिक मदद,मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं देती है,ताकि वे बिना किसी चिंता के अपना जीवन बेहतर बना सकें और सम्मान से जी सकें।
योजना का मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य
पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन बच्चों को सुरक्षा का कवच देना है,जिन्होंने महामारी के कारण अपना आधार खो दिया है। केंद्र सरकार का प्रयास है कि इन बच्चों को वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाया जाए ताकि वे अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें और अपने पैरों पर खड़े हो सकें। यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की मानसिक और शारीरिक मजबूती के लिए भी काम करती है।
पीएम केयर्स फाॅर चिल्ड्रन योजना सिर्फ आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं
पीएम केयर्स फाॅर चिल्ड्रन योजना सिर्फ आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं है,बल्कि बच्चों के भविष्य की शिक्षा, स्वास्थ्य,रहने और आर्थिक सुरक्षा को एक साथ जोड़ती है। योजना के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक अब तक 4,543 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं और योजना 31 राज्यों के 558 जिलों तक पहुंची है।बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सेहत का भी ध्यान रखा गया है।इस योजना के तहत सभी पात्र बच्चों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत जोड़ा जाता है और उन्हें 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक परेशानी के कारण बच्चे का इलाज प्रभावित न हो।
23 साल की उम्र में मिलेंगे 10 लाख
पीएम केयर्स फाॅर चिल्ड्रन योजना के तहत बच्चों को 23 वर्ष की आयु पूरी होने पर 10 लाख रुपये का एक कॉर्पस (राशि) प्रदान की जाती है।जब बच्चा 18 वर्ष का होता है, तो उसे मासिक Stipend मिलना शुरू हो जाता है,जिससे उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। 23 वर्ष की आयु में मिलने वाली यह राशि उनके करियर की शुरुआत, उच्च शिक्षा या स्टार्टअप के लिए एक बड़ा सहारा बनती है।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार उन बच्चों की स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का उठाती है पूरा खर्च
शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार उन बच्चों की स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का पूरा खर्च उठाती है।निजी स्कूलों में प्रवेश और ट्यूशन फीस में भी सहायता दी जाती है।वहीं स्वास्थ्य के मोर्चे पर आयुष्मान भारत योजना के तहत इन बच्चों को 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें किसी भी गंभीर बीमारी के दौरान बेहतर इलाज के लिए पैसों की तंगी न झेलनी पड़े।इस योजना के तहत स्कूल जाने वाले कक्षा 1 से 12 तक के पात्र बच्चों के लिए अलग छात्रवृत्ति व्यवस्था भी है। केंद्र सरकार के दिसंबर 2025 के आधिकारिक अपडेट के मुताबिक 20,000 रुपए प्रति बच्चा प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाती है। इसमें 1,000 रुपए प्रति महीने का भत्ता और ₹
8,000 रुपए का सालाना शैक्षणिक भत्ता शामिल है।यह राशि स्कूल फीस,किताबें,यूनिफॉर्म,जूते और दूसरी पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों में इस्तेमाल हो सकती है।
छोटे बच्चों की पढ़ाई का भी इंतजाम
अगर बच्चा 6 साल से कम उम्र का है तो उसे आंगनवाड़ी सेवाओं के जरिए पोषण,प्री-स्कूल शिक्षा,टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।वहीं 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नजदीकी सरकारी,सरकारी सहायता प्राप्त,केंद्रीय विद्यालय या पात्र निजी स्कूल में दाखिले की व्यवस्था की जा सकती है।सरकारी स्कूल में बच्चों को योजना के नियमों के तहत यूनिफॉर्म और किताबें मिल सकती हैं। निजी स्कूल में आरटीई के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
कैसे करें योजना के लिए आवेदन
पीएम केयर्स फाॅर चिल्ड्रन योजना का लाभ लेने के लिए आधिकारिक पोर्टल pmcaresforchildren.in पर पंजीकरण करना अनिवार्य है।आवेदन के समय माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्र और बच्चों के आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।जिला प्रशासन के स्तर पर नोडल अधिकारी इन आवेदनों की जांच करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ सही जरूरतमंद बच्चे तक ही पहुंचे।
आर्थिक और शैक्षणिक मदद के अलावा योजना में समय-समय पर परामर्श और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों को मानसिक रूप से भी सक्षम बनाना है ताकि वे कठिन परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।