नई दिल्ली।अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के ठिकानों पर फिर से ताबड़तोड़ हवाई हमले किए।इससे उन उम्मीदों पर पानी फिर गया कि पिछले हफ्ते हुई गोलीबारी के बाद शायद तनाव और नहीं बढ़ेगा। जुलाई के बाद पहली बार सीधे हमलों के आदान-प्रदान और सोमवार को होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे दो टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद तेल की कीमतें पहले ही बढ़ गई थीं।ईरान ने शिपिंग के लिए इस अहम समुद्री रास्ते को असल में बंद कर दिया है। इन खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स, जो उस दिन पहले ही 2 फीसदी ऊपर था, लगभग 2 फीसदी और उछल गया।
तेहरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि वह खाड़ी से तेल के निर्यात को रोकेगा।यह चेतावनी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए हमलों के जवाब में ईरान पर कड़ा प्रहार करने की धमकी दी और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी कि वाशिंगटन नए प्रतिबंध लगाने वाला है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने X पर पोस्ट किया आज दोपहर 12 बजे ET (1600 GMT) पर अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमले शुरू किए।ये हमले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल शिपिंग और इस इलाके में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर IRGC के हालिया हमलों की कोशिशों के जवाब में किए गए हैं।
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने कहा कि जलडमरूमध्य के उत्तरी हिस्से में ईरान के केशम द्वीप पर धमाकों की खबरें मिली हैं।सरकार से जुड़ी समाचार एजेंसी नूर न्यूज ने कहा कि बंदर अब्बास बंदरगाह शहर और दक्षिणी तट पर स्थित बंदरगाह चाबहार में धमाकों की खबरें मिली हैं।सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी जास्क और सिरिक में धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर दी।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया चैनल पर पोस्ट किया कि अगर ईरान ने हमले का जवाब दिया तो उन पर और भी जोरदार और बड़े स्तर पर हमला किया जाएगा।फार्स समाचार एजेंसी ने IRGC के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा कि अमेरिका को अपने नए हमलों पर पछतावा होगा।
कतर में अमेरिकी दूतावास ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकियों से कहा है कि वे ज्यादा सतर्क रहें और संभावित फ्लाइट कैंसिलेशन,एयरस्पेस बंद होने और यात्रा में रुकावटों के बारे में जानकारी रखें। वीकेंड पर हुए हमलों से पहले छह महीने से चल रहा टकराव एक आर्थिक गतिरोध में बदल गया था।रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के लराक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में जॉर्डन में दो अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागीं।हालांकि ट्रंप ने ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई की चेतावनी दी,लेकिन सोमवार को उन्होंने पत्रकारों से यह भी कहा कि ये हमले पूर्ण युद्ध की वापसी का संकेत नहीं हैं।वहीं ईरान के एक वरिष्ठ सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि यह एक सीमित और नियंत्रित टकराव था,लेकिन दोनों पक्षों की ओर से आगे के हमलों का जवाब देने के वादों ने यह दिखा दिया है कि प्रतिबंधों,नाकेबंदी और आर्थिक दबाव के जरिए लड़ा जा रहा टकराव कितनी तेजी से फिर से सैन्य कार्रवाई में बदल सकता है।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार की शुरुआत में किर्गिस्तान में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में कहा था कि अगर वाशिंगटन जून के उस समझौता ज्ञापन के तहत अपने वादों को पूरा करता है,जिसका मकसद टकराव को रोकना था,तो तेहरान तुरंत वैसा ही जवाब देगा।
इस समझौते में उस लड़ाई को खत्म करने की घोषणा की गई थी,जिसमें 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमले शुरू होने के बाद से ईरान और लेबनान में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं,लेकिन इसमें कई सबसे मुश्किल मुद्दों को टाल दिया गया और 60 दिनों की लंबी बातचीत की अवधि का रास्ता साफ़ किया गया,जो बिना किसी और समझौते के गुजर गई। तब से ईरानी अधिकारियों ने दबाव के आगे झुकने का कोई सार्वजनिक संकेत नहीं दिया है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा,अगर दुश्मन चाहता है कि हम फ़ारस की खाड़ी से तेल का निर्यात न करें तो कोई भी तेल का निर्यात नहीं कर पाएगा।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वाशिंगटन को अत्यधिक मांगें करने की लत लग गई है और उसने बातचीत को अपनी शर्तें थोपने का जरिया समझ लिया है।
उन्होंने कहा,जब तक वे इस तरह से काम करते रहेंगे,उन्हें निश्चित रूप से वही नतीजा मिलेगा जो उन्हें अब तक मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी सभी क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा,चाहे वह युद्ध के मैदान में हो या हमारे कूटनीतिक तंत्र के जरिए।
हालिया हमलों से पहले बेसेंट ने कहा था कि वाशिंगटन इस हफ्ते या अगले हफ्ते ईरान पर बैंक प्रतिबंधों की घोषणा कर सकता है,जिससे छह महीने के संघर्ष के बाद ईरान के नेतृत्व का आर्थिक रूप से दम घोंटने की कोशिशें और तेज हो जाएंगी। नॉर्थ कैरोलिना के ऐशविले में G20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में उन्होंने कहा कि अमेरिका उन एयरलाइन लीजिंग कंपनियों और दूसरी संस्थाओं पर भी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है जो IRGC के साथ कारोबार करती हैं। उन्होंने कहा,हम इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम इस सरकार की आर्थिक कमर तोड़ देंगे।
ईरान के नेताओं ने दशकों से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह नहीं की है।इनमें से कई प्रतिबंध तेहरान की तेल से होने वाली कमाई और हथियार बनाने के पुर्ज़े हासिल करने की कोशिशों को रोकने के लिए लगाए गए थे। बेसेंट ने यह भी चेतावनी दी है कि जो देश ईरान के साथ कारोबार करेंगे, उन पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं।
PVM के एनालिस्ट जॉन इवांस ने कहा,अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर मिसाइल हमले करने से उन लोगों की बात सही साबित होती है,जिनका मानना है कि भले ही यह हमेशा चलने वाली जंग न हो,लेकिन यह टकराव लंबे समय तक चलता रहेगा।
शिपिंग इंटेलिजेंस और ट्रैकिंग कंपनियों मैरिस्क और केप्लर के डेटा के मुताबिक इन चिंताओं के बीच सोमवार देर रात होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलते समय सऊदी अरब का तेल ले जा रहे दो सुपरटैंकरों पर कुछ ही मिनटों के अंतराल पर अज्ञात चीजों से हमले हुए।