नई दिल्ली| चीन ने विदेशी निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है।चीन ने विदेशी इन्वेस्टर्स को मिलने वाली दशकों पुरानी टैक्स छूट को खत्म कर दिया है।अब विदेशी निवेशकों और नागरिकों को चीन में फॉरेन इन्वेस्टमेंट वाली कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड,ब्याज और बोनस पर 20 फीसदी पर्सनल कर देना होगा।चीन के वित्त मंत्रालय और स्टेट टैक्सेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने 1 सितंबर से यह नियम लागू कर दिया है।
इकॉनमी मजबूत करने के लिए बना था नियम
टैक्स में छूट का ये नियम साल 1994 में शुरू किया गया था, जब चीन विदेशी पूंजी आकर्षित करने और अपनी अर्थव्यवस्था को विश्व के लिए खोलने की नीति पर काम कर रहा था।उस समय विदेशी निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए डिविडेंड आय को टैक्स से फ्री रखा गया था,लेकिन अब बीजिंग का मानना है कि चीन की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत हो चुकी है कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए इस तरह की विशेष रियायतों की जरूरत नहीं है।चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार यह फैसला देश की टैक्स व्यवस्था को एक समान बनाने और विभिन्न निवेशकों के बीच कर संबंधी असमानता खत्म करने के लिए लिया गया है। अभी तक घरेलू चीनी निवेशकों को डिविडेंड पर टैक्स देना पड़ता था, जबकि विदेशी निवेशकों को छूट मिलती थी। नई व्यवस्था के बाद दोनों पर समान कर नियम लागू होंगे।
अब क्या है टैक्स का नया नियम
विदेशी निवेशकों को मिलने वाली छूट को समाप्त कर 20 फीसदी टैक्स लगाने के दिशानिर्देश दिए हैं। नए नियमों के तहत विदेशी निवेश वाली कंपनियों को डेविडेंट का भुगतान करते समय टैक्स रोकना होगा और अगले महीने की 15 तारीख तक इसे जमा करना होगा। वित्त मंत्रालय और राज्य कर प्रशासन के संयुक्त बयान के अनुसार, यदि टैक्स नहीं रोका जाता है, तो विदेशी व्यक्तियों को अगले साल की 30 जून तक सीधे इसका भुगतान करना होगा। यह नई पॉलिसी 1 सितंबर 2026 से लागू है।
चीन पर भी दिखेगा असर
जानकारों का मानना है कि शार्ट टर्म में यह कदम विदेशी निवेशकों की लागत बढ़ा सकता है,लेकिन चीन का तर्क है कि अब निवेशक केवल टैक्स रियायतों के आधार पर नहीं, बल्कि बाजार के आकार, सप्लाई चेन, कानूनी ढांचे और कारोबारी माहौल को देखकर इन्वेस्ट करने का निर्णय लेते हैं। इसलिए सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव का विदेशी निवेश पर बड़ा निगेटिव असर नहीं पड़ेगा।