बारिश और जंग ने बढ़ाई परेशानी,महंगी हो रही खाने की थाली,प्याज और अदरक से लेकर खाने के तेल,दूध-पनीर और चिकन तक महंगाई का बढ़ रहा दबाव
बारिश और जंग ने बढ़ाई परेशानी,महंगी हो रही खाने की थाली,प्याज और अदरक से लेकर खाने के तेल,दूध-पनीर और चिकन तक महंगाई का बढ़ रहा दबाव

15 Sep 2026 |   27



 

नई दिल्ली।आम आदमी के लिए रोज का खाना महंगा होता जा रहा है।प्याज,अदरक और खाने के तेल से लेकर दूध-पनीर तक कई जरूरी चीजों के दाम बढ़े हैं।इसका सीधा असर घर के महीने के खर्च पर पड़ रहा है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त के महंगाई आंकड़ों में प्याज के दाम एक साल पहले के मुकाबले लगभग 50 फीसदी बढ़े हैं।अदरक 70 फीसदी से ज्यादा महंगा हुआ है। खाने के तेल के दाम भी बढ़ रहे हैं।यह चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा खाने पर खर्च होता है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक...

ब्लूमबर्ग के मुताबिक गांवों में कुछ परिवार महीने के कुल खर्च का करीब आधा हिस्सा खाने-पीने पर खर्च करते हैं।शहरों में यह हिस्सा करीब 40 फीसदी है। यानी खाना महंगा होने पर परिवार को दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।

महंगी हो रही खाने की थाली

खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के पीछे कई वजह हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कम बारिश,एथेनॉल बनाने में अनाज का बढ़ता इस्तेमाल और ईरान तथा यूक्रेन से जुड़े युद्ध कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।जून से अब तक मानसून की बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम रही है। सितंबर में भी कम बारिश होने का अनुमान है।इसका असर धान,मक्का, सोयाबीन और गन्ने जैसी फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है।धान और मक्का की बुआई भी पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी से ज्यादा पीछे चल रही है। वहीं कम पैदावार की चिंता के कारण अगस्त में चीनी के दाम भी बढ़े। इसके बाद सरकार को कुछ चीनी बिना आयात शुल्क के विदेश से मंगाने की अनुमति देनी पड़ी।

क्वांटइको की अर्थशास्त्री युविका सिंघल ने ब्लूमबर्ग को ये बताया

क्वांटइको की अर्थशास्त्री युविका सिंघल ने ब्लूमबर्ग को बताया कि जिन वर्षों में बारिश कम होती है,उनमें सामान्य के मुकाबले बारिश में हर 1 फीसदी की कमी खाने-पीने की चीजों की महंगाई को करीब 0.25 प्रतिशत अंक बढ़ा सकती है।

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से खाना कैसे हो सकता है महंगा

अर्थशास्त्री युविका सिंघल ने बताया कि भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाता है।एथेनॉल गन्ने के साथ मक्का और चावल से भी बनाया जा सकता है।देश ने पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने के लक्ष्य को पहले तय समय से जल्दी हासिल करने पर जोर दिया है।इससे एथेनॉल बनाने के लिए मक्का और चावल की मांग बढ़ी है। आसान शब्दों में कहें तो जिस अनाज का इस्तेमाल खाने या पशुओं के चारे में हो सकता है, उसके एक हिस्से की मांग अब एथेनॉल बनाने के लिए भी बढ़ रही है।

बीओबी के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने ये कहा

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने ब्लूमबर्ग से कहा कि अगर किसानों को एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों से ज्यादा दाम मिलते हैं तो वे अपनी फसल उन्हें बेचना पसंद कर सकते हैं।इससे खाने और पशुओं के चारे के लिए मिलने वाले अनाज पर दबाव पड़ सकता है।सामान मिलना शायद बड़ी परेशानी न बने,लेकिन उसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

चिकन भी हो सकता है महंगा

मदन सबनवीस ने कहा कि अनाज महंगा होने का असर चिकन की कीमत पर भी पड़ सकता है।इसकी वजह है कि मुर्गियों के चारे में भी अनाज का इस्तेमाल होता है।

ब्लूमबर्ग ने मुंबई में चिकन और अंडे बेचने वाले अजाज आजम कुरैशी का दिया उदाहरण

 ब्लूमबर्ग ने मुंबई में चिकन और अंडे बेचने वाले अजाज आजम कुरैशी का उदाहरण दिया है।कुरैशी के मुताबिक पिछले एक महीने में पक्षियों के चारे का खर्च दोगुना हो गया है।कुरैशी ने चिकन का भाव 240 रुपये किलो से बढ़ाकर 260 रुपये कर दिया है।आगे इसे 300 रुपये किलो तक करने की तैयारी है।कुरैशी का कहना है कि लागत बढ़ने पर दाम बढ़ाना मजबूरी है,लेकिन चिकन महंगा होने पर लोग खरीदारी कम कर सकते हैं।अगर चारा सस्ता नहीं हुआ तो चिकन के दाम कम करना भी मुश्किल होगा।

दूध-पनीर और खाना पकाना भी हुआ महंगा

महंगाई सिर्फ सब्जी और अनाज तक सीमित नहीं है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक दूध और पनीर जैसी रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हुई हैं।खाना पकाने का खर्च भी बढ़ा है।पश्चिम एशिया में लड़ाई के कारण इस साल रसोई गैस की सप्लाई में भी परेशानी हुई।नोएडा में छोटा रेस्तरां चलाने वाले शिवम फौजदार ने ब्लूमबर्ग को बताया कि रसोई गैस महंगी होने के बाद उन्हें खाने के दाम बढ़ाने पड़े थे।अब सब्जी और दूसरी चीजों का खर्च भी बढ़ रहा है,लेकिन उनके लिए खाने के दाम फिर बढ़ाना मुश्किल है।शिवम का कहना है कि आसपास कई ठेले कम कीमत पर खाना बेचते हैं। इसलिए ज्यादा दाम करने पर ग्राहक दूसरी जगह जा सकते हैं।

त्योहारों से पहले बढ़ रही चिंता

खाने की चीजें ऐसे समय महंगी हो रही हैं जब त्योहारों का समय शुरू हो रहा है।दिवाली के आसपास मिठाई,चीनी और खाने के तेल जैसी चीजों की मांग बढ़ जाती है।ऐसे में अगर इन चीजों के दाम पहले से ऊंचे रहे तो त्योहारों पर परिवारों का खर्च और बढ़ सकता है।इस महंगाई का असर सिर्फ रसोई तक नहीं है। इसका असर ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। खुदरा महंगाई के आंकड़े में खाने-पीने की चीजों की हिस्सेदारी एक-तिहाई से ज्यादा है। इसलिए खाना तेजी से महंगा होता है तो कुल महंगाई भी बढ़ सकती है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक...

ब्लूमबर्ग के मुताबिक अगस्त में खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के तय दायरे की ऊपरी सीमा के करीब पहुंच गई। यह लगातार तीसरा महीना था जब महंगाई आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रही। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी हाल में महंगाई को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।अगर खाने,ईंधन और दूसरी जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ते रहे तो आरबीआई के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला लेना मुश्किल हो सकता है।अब सबसे ज्यादा नजर बारिश,फसलों की पैदावार,अनाज और तेल की कीमतों तथा ईरान और यूक्रेन से जुड़े युद्धों पर रहेगी। इनमें हालात नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में आम आदमी की थाली और महंगी पड़ सकती है।

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