डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिए साइन,भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, जानें इसका क्या होगा असर
डोनाल्ड ट्रंप ने कर दिए साइन,भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, जानें इसका क्या होगा असर

21 Sep 2026 |   21



 

नई दिल्ली।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर साइन कर दिए हैं।इससे रूस और उससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार ट्रंप को होगा।
भारत पर 100 फीसदी टैरिफ का खतरा बढ़ गया है।ट्रंप के निशाने पर जो देश सबसे टॉप पर हैं,उसमें भारत भी शामिल है,क्योंकि ये रूसी तेल के बड़े आयातकों में चीन के साथ आता है।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप अगर बिल के मुताबिक भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाते हैं तो इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है,क्योंकि भारत और अमेरिका बड़े ट्रेड पार्टनर हैं और देश के यूएस को होने वाले निर्यात का आंकड़ा काफी बड़ा है। इसके साथ ही भारत-अमेरिका में जारी व्यापार वार्ता पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

क्या है यूएस का कानून,कैसे करेगा काम

लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम का ये बिल रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों को टारगेट करता है,इसमें चीन,भारत, स्लोवाकिया,हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।बीते माह अगस्त में अमेरिकी सीनेट में इस बिल को 86-11 वोट से पास किया गया था, इसके बाद इसे मंजूरी मिली और अब व्हाइट हाउस की ओर से बताया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इसपर हस्ताक्षर कर दिए हैं।न सिर्फ रूस,बल्कि ये कानून ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है।खासतौर अब ट्रंप को उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल रहा है,जो Russian Oil-Gas खरीदते हैं। इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इसमें शामिल लिस्ट का आकलन करेंगे।हालांकि अमेरिका के इस कदम पर भारत ने दो-टूक कह दिया है कि देश के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।

रूसी तेल का बड़ा खरीदार,टैरिफ से ये संकट

बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत लगातार Russian Oil का आयात कर रहा है और रियायती दरों पर मिल रहे इस कच्चे तेल की खरीद में इजाफा भी होता गया है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 40 फीसदी से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है।अगस्त 2026 में भारत ने रूस से लगभग 20.8 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड खरीदा,इससे पहले जुलाई में ये आंकड़ा और भी ज्यादा 28.2 लाख बैरल प्रतिदिन था।अब अगर अमेरिका की ओर से 100 फीसदी टैरिफ के खतरे के चलते भारत रूस के रियायती तेल के बजाय अन्य देशों से तेल की खरीद करता है, तो ये सीधे भारत के आयात बिल में तेज उछाल लाने वाला साबित होगा।तेल महंगा खरीदने से देश में महंगाई का जोखिम भी बढ़ जाएगा। खासतौर पर पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की मार पड़ सकती है और इससे आम आदमी बुरी तरह प्रभावित होगा।रूस के अलावा कच्चा तेल पश्चिम एशिया,अमेरिका,अफ्रीका या अन्य बाजारों से आ सकता है,लेकिन वैश्विक तेल कीमतों, माल ढुलाई लागत,रिफाइनरी की जरूरतों और उपलब्धता के आधार पर ये महंगा पड़ सकता है।साफ शब्दों में कहें, तो रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता में भारी कमी से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और देश के व्यापार संतुलन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

अमेरिका से कारोबार पर टैरिफ की मार

अभी भारत पर अमेरिकी टैरिफ 10 फीसदी है,लेकिन अगर नए बिल के तहत भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखता है, तो फिर भारत को 100 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।इसका सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर देखने को मिलेगा।हाई टैरिफ लागू होने से भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा और इन महंगे सामानों के बजाय अमेरिकी ग्राहक बांग्लादेश,वियतनाम या फिर अन्य दूसरे देशों से आने वाले सस्त ऑप्शन की ओर ट्रांसफर होने लगेंगे,जो भारत के निर्यात पर बड़ी चोट होगी।बता दें कि देश से टेक्सटाइल,फार्मा,जेम्स-ज्वेलरी,इंजीनियरिंग गुड्स,लेदर,मरीन प्रोडक्ट्स के साथ ही केमिकल्स बड़ी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। टैरिफ से इनके ऑर्डर घटने का खतरा है।

वाणिज्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में माल और वस्तुओं के व्यापार के दिए गए डेटा को देखें...

वाणिज्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में माल और वस्तुओं के व्यापार के दिए गए डेटा को देखें, तो पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि बीते वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में अगस्त 2026 में भारत का अमेरिका को निर्यात 21.83 फीसदी की उछाल के साथ 8.4 अरब डॉलर (करीब 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) रहा है, जबकि अमेरिका से भारत आने वाले माल की आयात में 65.78 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 5.97 अरब डॉलर तक पहुंच गया।भारत के अमेरिका को होने वाले औसत मासिक निर्यात में सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान 50 फीसदी टैरिफ लागू होने के कारण गिरावट आई थी, जो घटकर 6.5 अरब डॉलर रह गया था, जबकि इससे पहले के छह महीनों में यह 8.1 अरब डॉलर था। अब टैरिफ रेट घटकर 10 फीसदी हो जाने के कारण यह बढ़ गया है।भारत पर इस साल जुलाई में आयात पर जबरन श्रम के आरोपों के चलते 10 फीसदी का शुल्क भी लगाया गया है।

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