ठोस तथ्य लाएं,अलग नहीं कर सकती,केजरीवाल को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की दो-टूक
ठोस तथ्य लाएं,अलग नहीं कर सकती,केजरीवाल को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की दो-टूक

13 Apr 2026 |   20



 

नई दिल्ली।सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य की याचिका पर सुनवाई की।याचिका में मांग की गई थी कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लें।जस्टिस शर्मा ने सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणियों में कहा कि महज इसलिए कि मैंने पहले कड़े फैसले दिए हैं,मैं खुद को अलग नहीं कर सकती हूं।जस्टिस शर्मा ने साफ किया कि केस से हटने के लिए ठोस कारण होने चाहिए और केवल यह सोचना कि मैं न्याय नहीं कर पाऊंगी या किसी एजेंसी का पक्ष ले रही हूं काफी नहीं है।

मैं खुद को अलग नहीं कर सकती-जस्टिस शर्मा

अरविंद केजरीवाल की ओर से दलीलें रखे जाने के बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपनी एक टिप्पणी में कहा कि सभी याचिकाओं में एक बात कॉमन है।चूंकि मैंने पहले के आदेश में मजबूत नतीजे दिए हैं इसलिए मैं खुद को अलग नहीं कर सकती हूं। रिक्यूजल केवल 2 वजहों से दिया जाएगा।सबसे जरूरी यह कि आपको लग रहा है कि मैं आपके साथ न्याय नहीं कर पाऊंगी या फिर मैं सीबीआई और ईडी को राहत दे रही हूं तो ऐसा नहीं है। इसे साबित करने के लिए ठोस तथ्य पेश करें।

सीबीआई ने 4 घंटे के भीतर दाखिल कर दी याचिका

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने अपनी दलीलों में कहा कि 27 फरवरी को निचली अदालत का फैसला आया और सीबीआई ने मात्र 4 घंटे के भीतर इस अदालत में अपील दाखिल कर दी। 500 से अधिक पन्नों के इस फैसले में अदालत ने हर आरोप की बारीकी से जांच करने के बाद विस्तार से अपना निष्कर्ष दिया है।

सीबीआई की अपील पहले दिन कर देनी थी खारिज

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई की अपील में अदालत के उन निष्कर्षों को चुनौती देने वाला कोई ठोस आधार नहीं है,इसलिए इस अपील को पहले दिन ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था। वह याचिका त्रुटिपूर्ण है और उसी त्रुटिपूर्ण याचिका पर एक व्यापक आदेश पारित कर दिया गया।

जस्टिस शर्मा के आदेशों में नजर आ रहा यह ट्रेंड

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक अरविंद केजरीवाल ने अपनी दलील में कहा कि जस्टिस शर्मा ने शराब नीति मामले में ईडी और सीबीआई के पक्ष में लगातार फैसले दिए हैं। जस्टिस शर्मा के आदेशों में ईडी और सीबीआई की हर बात को मानने का एक ऐसा ट्रेंड नजर आ रहा है जिसमें जांच एजेंसियों की हर दलील मान ली जाती है और फैसला उनके पक्ष में आता है।

आरोपियों को बरी करने का सही फैसला दिया

अरविंद केजरीवाल ने अपनी दलीलों में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने तीन महीने की सुनवाई के बाद उन्हें और अन्य आरोपियों को बरी करने का सही फैसला दिया था लेकिन जस्टिस शर्मा ने बहुत कम सुनवाई के बाद उस पर रोक लगा दी। सोमवार को दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 17 अप्रैल की तारीख तय की है।

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