ब्यूरो सुनील कुमार पाण्डेय
अयोध्या।राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच आगे बढ़ रही है,तो इस पूरे खेल की नई परतें खुल रही हैं।पुलिस जांच में एक ऐसे सुनसान ठिकाने का पता चला है,जो चोरी करने वाले आरोपियों का मीटिंग पॉइंट था।यही वो जगह थी,जहां राम मंदिर से चढ़ावा का पैसा निकालने के बाद आरोपी पहुंचते थे और यहीं बैठकर पैसा बांटते थे। शनिवार को पुलिस आरोपी अविनाश शुक्ला को रिमांड के दौरान इसी जगह पर लेकर पहुंची थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक...
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह जगह अयोध्या-लखनऊ हाइवे के किनारे 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का एक सुनसान इलाका है।यह ट्रकों की मरम्मत वाली एक आम-सी जगह लगती है, लेकिन जांच में सामने आया कि कथित तौर पर यहीं पूरे खेल की सबसे अहम बैठक होती थी।आरोपी चोरी के बाद सीधे अपने-अपने घर नहीं जाते थे।पहले वे इस सुनसान जगह पर पहुंचते थे।यहां अविनाश शुक्ला,लवकुश मिश्रा,अनुकल्प मिश्रा,रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और अन्य आरोपी इकट्ठा होते थे।बाद के दिनों में टिन्नू का भतीजा भी इन बैठकों का हिस्सा बनने लगा था।यहीं चढ़ावा चोरी का पैसा निकाला जाता, उसका हिसाब होता और फिर सबके हिस्से तय किए जाते। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर बताया कि ज्यादातर रकम बराबर-बराबर बांटी जाती थी। हालांकि कई बार कुछ लोगों को ज्यादा हिस्सा भी मिलता था।पूरे नेटवर्क में टिन्नू का दबदबा था और उसी की बात सबसे ज्यादा मानी जाती थी।
पुलिस क्यों पहुंची इस जगह
13 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान शनिवार को अयोध्या पुलिस अविनाश शुक्ला को सिर्फ पूछताछ के लिए नहीं घुमा रही थी, बल्कि पुलिस उस पूरी कहानी को जोड़ रही थी,जो पूछताछ में सामने आई थी।सबसे पहले पुलिस अविनाश को कौशलपुरी स्थित श्याम साधना योग केंद्र लेकर गई।वहां कुछ दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की तलाश की।इसके बाद पुलिस सीधे 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के उसी सुनसान इलाके में पहुंची।पुलिस ने अविनाश से कथित तौर पर उस जगह की निशानदेही कराई,जहां चोरी के बाद आरोपियों की बैठक होती थी।जांच अधिकारी यह समझना चाहते थे कि आरोपी वहां कैसे पहुंचते थे,कितनी देर रुकते थे और पैसे का बंटवारा किस तरीके से होता था।
सूत्रों के मुताबिक...
सूत्रों के मुताबिक अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में बताया कि गैंग को पकड़े जाने का डर कम था।वजह थी कि उन्हें भरोसा था कि CCTV फुटेज उनके खिलाफ सबूत नहीं बन पाएंगे। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू कथित तौर पर बाकी आरोपियों से कहता था- कुछ नहीं होगा, CCTV फुटेज डिलीट कर दिए जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक...
सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने कई बार कंट्रोल रूम तक पहुंचकर CCTV सिस्टम से छेड़छाड़ की।एक-दो मौकों पर फुटेज डिलीट भी कर दिए।हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच के लिए जरूरी कई अहम फुटेज सुरक्षित मिल गए हैं और वही अब पूरे केस की सबसे मजबूत कड़ी बन रहे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के पैसों से क्या-क्या खरीदा
पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने यह भी बताया कि चोरी की रकम सिर्फ खर्च नहीं की गई,बल्कि उससे संपत्तियां भी बनाई गईं।पुलिस के मुताबिक इसी पैसे से एक ब्रेजा कार खरीदी गई।कार उसने अपने भाई के नाम पर खरीदी,क्योंकि वह शिक्षक है और उसे लगा कि इससे किसी को शक नहीं होगा। गांव में मकान बनवाने और भाई को बड़ी रकम देने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी की निशानदेही पर यह कार भी बरामद कर ली गई।
सूत्रों के मुताबिक...
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला को लगभग 45 दिनों की CCTV फुटेज दिखाई।फुटेज में खुद को कथित तौर पर चोरी करते देख अविनाश ज्यादा देर तक इनकार नहीं कर सका और उसने चोरी की बात स्वीकार कर ली।
अविनाश से पूछताछ के बाद पुलिस बाकी आरोपियों तक पहुंच रही...
बता दें कि अविनाश शुक्ला से पूछताछ के बाद अब पुलिस बाकी आरोपियों तक पहुंच रही है।अदालत से अनुमति मिलने के बाद जांच अधिकारी जेल जाकर अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, करुणेश पांडे और मनीष यादव से पूछताछ करेंगे।फिलहाल पुलिस एक-एक कड़ी जोड़ रही है।योग केंद्र से लेकर ब्रेजा कार तक, CCTV से लेकर 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के उस सुनसान ठिकाने तक हर जगह अब इस जांच की कहानी का हिस्सा बन चुकी है। जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड की नई परतें सामने आती जा रही हैं।