लखनऊ में गोमती-कुकरैल-शारदा नहर में दौड़ेंगी वॉटर टैक्सी,लोगों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत,1170 करोड़ का सिटी ट्रांसपोर्टेशन प्रॉजेक्ट
लखनऊ में गोमती-कुकरैल-शारदा नहर में दौड़ेंगी वॉटर टैक्सी,लोगों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत,1170 करोड़ का सिटी ट्रांसपोर्टेशन प्रॉजेक्ट

15 Jul 2026 |   35



 

लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोगों के लिए खुशखबरी है।अब लोग आवागमन नदी और नहर के जरिए करेंगे।यूपी स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) ने लखनऊ के लिए सिटी वॉटर ट्रांसपोर्टेशन प्रॉजेक्ट का खाका खींचा है।गोमती नदी, कुकरैल, शारदा नहर में वॉटर टैक्सी दौड़ेंगी। चार दिन पहले शासन की हाई लेवल कमिटी के सामने इस योजना का प्रेजेंटेशन हुआ है। 1170 करोड़ रुपये की इस योजना को 4 चरणों में पूरा किया जाएग। हर चरण को 2 साल में पूरा करने का लक्ष्य है, जिसे साल 2032 तक पूरा करने का दावा किया गया है।

लोगों को मिलेगी ट्रैफिक जाम से राहत

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक जाम से राहत देना है। नदी-नहर के रास्ते 20-30 मिनट में शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच सकेंगे। वॉटर टैक्सी का किराया बस और ऑटो से कम रखा जाएगा। यूपी जल निगम और एलडीए मिलकर इस प्रॉजेक्ट को चलाएंगे। खर्च के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया जाएगा। गंगा और घाघरा से पानी लाने से गोमती-कुकरैल में पानी की कमी भी दूर होगी।

जानिए रूट के बारे में

गोमती नदी: राष्ट्र प्रेरणा स्थल से ला-मार्टिनियर कॉलेज बैराज तक, दूरी 13.80 किमी

कुकरैल नदी: कल्याणपुर पूर्व से गोमतीनगर तक, दूरी 6.80 किमी

हैदर कैनाल: सरोसा भारोसा से शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय तक, दूरी 13.41 किमी

शारदा नहर: सरोसा-भारोसा से SGPGI दूरी, 20 किमी

सीधे गोमती-सई में नही जाएगी नालों की गंदगी

स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) में गोमती और सई नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बड़ी पहल शुरू हो रही है। एससीआर में शामिल 6 जिलों में लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव और रायबरेली में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लॉट (एसटीपी) लगाए जाएंगे। इन पर 300 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। अर्बन सीवेज ट्रीटमेंट फैसिलिटी के तहत बनने वाले इन प्लांट्स को 2051 तक बढ़ने वाली आबादी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। काम शुरू होने के बाद इसे 2 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सात बड़े नाले सीधे गिर रहे गोमती में

फिलहाल लखनऊ शहर में लगभग 790 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) सीवर और नालों का गंदा पानी निकलता है, लेकिन शहर में मौजूद 3 बड़े एसटीपी की क्षमता सिर्फ 520 एमएलडी ही है। ऐसे में 270 एमएलडी गंदा पानी बिना ट्रीट हुए सीधे गोमती नदी में जा रहा है। दरअसल, पहले शहर के 26 नाले गोमती में गिरते थे, जिन्हें भरवारा और दौलतगंज एसटीपी से जोड़ा जा चुका है। लेकिन अभी भी 7 बड़े नाले सीधे गोमती में गिर रहे हैं। इसी वजह से नदी लगातार प्रदूषित हो रही है।

कहां-कहां बनेंगे नए एसटीपी

बिजनौर- 100 MLD निर्माणाधीन

लोनिया पुरवा- 50 MLD निर्माणाधीन

बरीकला- 3.50 MLD निर्माणाधीन

वसंतकुज- 145 MLD प्रस्तावित

वजीरगं- 60 MLD प्रस्तावित

जियामऊ- 132 MLD प्रस्तावित

मस्तेमऊ- 5 MLD प्रस्तावित

इसके अलावा बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली में भी एसटीपी प्रस्तावित हैं।

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