डिस्‍काउंट में 2 से 20 डॉलर तक स्विंग,रूसी तेल बना भारत के लिए बैरोमीटर
डिस्‍काउंट में 2 से 20 डॉलर तक स्विंग,रूसी तेल बना भारत के लिए बैरोमीटर

27 Jul 2026 |   25



 

नई दिल्‍ली।अमेरिका और ईरान जंग से रूसी कच्चे तेल की कीमतें लगातार घटती-बढ़ती रही हैं।भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये कीमतें बाजार की घबराहट का पैमाना बन गईं।ज़ंग से पहले डिस्काउंट लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल था। सप्लाई को लेकर मची अफरातफरी के चरम पर बेंचमार्क ब्रेंट से यह 20 डॉलर तक ज्‍यादा (प्रीमियम) हो गया। फिर थोड़े समय के लिए सीजफायर के दौरान वापस लगभग 10 डॉलर के डिस्काउंट पर आ गया।अमेरिका और ईरान में जंग फिर शुरू होने पर यह लगभग बराबरी पर लौट आया।जब ईरान ने मार्च की शुरुआत में होर्मुज स्‍ट्रेट को बंद कर दिया तब खाड़ी से सप्लाई लाने वाले कच्चे तेल के टैंकर फारस की खाड़ी में फंस गए। इससे दूसरे विकल्पों की तेजी से तलाश शुरू हुई।

मददगार साबित हुआ रूस

बता दें कि रूस मददगार साबित हुआ। रूसी कार्गो की बड़ी मात्रा पहले से ही समुद्र में (हिंद महासागर सहित) मौजूद थी। इससे वे भारतीय रिफाइनरियों तक अपेक्षाकृत तेजी से पहुंच सके,लेकिन जब खरीदार हर उपलब्ध कार्गो के लिए होड़ कर रहे थे तब रूसी कच्चे तेल के विक्रेता भारी प्रीमियम वसूलने में कामयाब रहे।भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल के लिए 12-20 डॉलर प्रति बैरल का प्रीमियम चुकाया,जिन रिफाइनरियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पिछले तीन महीनों में रूस से खरीद लगातार कम की थी,उन्होंने मार्च में आयात दोगुना कर दिया।

भारत के आयात में रूसी तेल की हिस्‍सेदारी

तब से भारत के आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी या उससे ज्‍यादा बनी हुई है।हालांकि इन बैरल को खरीदने की लागत सप्लाई के जोखिम को लेकर बदलती धारणाओं के साथ घटती-बढ़ती रही है।चीन की ओर से कच्चे तेल की खरीद में भारी कमी आने से भी भारत और अन्य खरीदारों के लिए अतिरिक्त रूसी कार्गो उपलब्ध हो गए।

भारत लाया है सप्‍लाई में विविधता

हाल के दिनों में भारतीय रिफाइनरी अपनी सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाई हैं।अंगोला,गैबॉन और कांगो से कार्गो हासिल किए हैं। जबकि सऊदी अरब ने खाड़ी में आई रुकावटों की भरपाई के लिए अपने रेड सी एक्सपोर्ट टर्मिनल से शिपमेंट बढ़ा दिए। सप्लाई को लेकर डर कम होने से अप्रैल तक रूसी कच्चे तेल पर प्रीमियम घटकर लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल रह गया।मई तक प्रीमियम लगभग खत्म हो गया,क्योंकि ब्राजील,वेनेजुएला,सऊदी अरब और संयुक्‍त अरब अमीरात से सप्लाई बेहतर हो गई। ईरान-अमेरिका युद्धविराम ने बाजार को भरोसा दिलाया कि सप्लाई में बड़ी रुकावट की संभावना कम है।

दोबारा आया डिस्‍काउंट का दौर

जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते से रूसी कच्चे तेल पर डिस्काउंट फिर से शुरू हो गया। बेंचमार्क ब्रेंट की कीमत अप्रैल में 120 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर लगभग 71 डॉलर प्रति बैरल हो गई। कारण था कि ट्रेडर्स ने जियोपॉलिटिकल रिस्‍क कम होने का अनुमान लगाया। इससे रूसी तेल पर डिस्काउंट बढ़कर लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

टेंशन बढ़ने से खत्‍म हुई छूट

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग शुरू होने से वो छूट खत्म हो गई हैं।सप्लाई से जुड़े बढ़ते जोखिमों के कारण व्यापारी अब कीमत में कोई रियायत देने को तैयार नहीं हैं।जंग भी बढ़ती हुई दिखाई दे रहा है।कारण है कि यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही लाल सागर में कमर्शियल जहाजों पर हमले तेज कर रहे हैं।इससे भारत के दूसरे सबसे बड़े सप्लायर सऊदी अरब से होने वाले एक्सपोर्ट में रुकावट आ रही है। ग्लोबल सप्लाई को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमत वापस लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

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