नई दिल्ली।चीन विश्व का दूसरा बड़ा इकॉनमी वाला देश है, लेकिन चीन की इकाॅनमी सुस्त पड़ने लगी है।इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी में पिछले साल के मुकाबले 4.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई,जो 2022 की चौथी तिमाही के बाद सबसे धीमी रफ्तार है।सरकार ने इकॉनमी के जून तिमाही में 4.5 फीसदी से 5.0 फीसदी तक बढ़ने का लक्ष्य रखा था,लेकिन जीडीपी की बढ़ने की रफ्तार उससे काफी कम रही।
चीन की स्थिति लगातार होती जा रही बद से बदतर
चीन की इकॉनमी में पहली तिमाही में 5.0 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी।इससे साल की पहली छमाही में जीडीपी की कुल बढ़ोतरी 4.7 फीसदी रही।इस दौरान फिक्स्ड-एसेट इन्वेस्टमेंट में पिछले साल के मुकाबले 5.7 फीसदी की गिरावट आई है। पहले 5 महीनों के दौरान यह 4.1 फीसदी थी।चीन की स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है।
जापान की तरह सुस्ती की आशंका
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट में आई गिरावट है।पहली छमाही में चीन में प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट में 18 फीसदी की भारी गिरावट आई है जो 1992 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।हालांकि रिटेल बिक्री में मई में 0.6 फीसदी की गिरावट के बाद जून में 1फीसदी की तेजी आई है,लेकिन ऑटो की खरीद में 16 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।इससे साफ है कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अब संकट कई सेक्टर्स में फैल रहा है।यह विश्व के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है।पिछले दो दशक में चीन ग्लोबल इकॉनमी के ग्रोथ का इंजन रहा है,लेकिन अब उसकी रफ्तार धीमी पड़ने लगी है।अब चीन की इकॉनमी के भी जापान की तरह सुस्ती में फंसने की आशंका है।जापान की इकॉनमी 1990 के दशक में तेजी से बढ़ रही थी,लेकिन उसके बाद से यह सुस्ती का सामना कर रही है।